यूपी में चाचा को भतीजे की फटकार तो बिहार में भतीजे को चाचा की ललकार, जानें अब क्यों मची रार?

लखनऊ: उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार की सियासत में चाचा-भतीजे की जोड़ी में फिर तल्खी बढ़ गई है. यूपी में जहां चाचा को भतीजा फटकारते दिख रहा है, वहीं बिहार में भतीजे को चाचा ललकारते हुए दिख रहे हैं. इस तरह से देखा जाए तो दोनों बड़े सियासी राज्यों में चाचा-भतीजे के बीच सियासी रार बढ़ गई है. यूपी चुनाव में जहां अब तक भतीजे अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल यादव के बीच रिश्ते मधुर थे, चुनाव खत्म होते ही इस चाचा-भतीजे के रिश्ते में खटास आ गई है. वहीं, बिहार में अब तक सीधे तौर पर कम अटैकिंग रहे चाचा पशुपति पारस ने चिराग पासवान के खिलाफ हमले तेज कर दिए हैं.

उत्तर प्रदेश की बात करें तो प्रसपा प्रमुख शिवपाल यादव और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के बीच रिश्‍तों की खटास अपने चरम पर है. अखिलेश यादव ने एक तरह से सांकेतिक तौर पर चाचा शिवपाल सिंह यादव को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. बीते दिनों समाजवादी पार्टी ने एक बयान जारी करके शिवपाल सिंह यादव से साफ कह दिया कि आपको जहां ज्‍यादा सम्‍मान मिले, आप वहां जा सकते हैं. भले ही अखिलेश यादव ने साफ तौर पर गठबधन तोड़ने का ऐलान हीं किया, मगर इस आधिकारिक बयान से यह तय हो गया कि फिलहाल चाचा-भतीजे की जोड़ी साथ-साथ नहीं चल सकती.

दरअसल, शिवपाल और अखिलेश यादव के बीच दूरी बढ़ने के कई कारण हैं. चाचा शिवपाल यादव ने ही सबसे पहले अखिलेश यादव पर आरोप लगाया था कि उन्हें विधायक दल की बैठक में नहीं बुलाया गया था, जबकि वे सपा के विधायक हैं. इतना ही नहीं, जब सीएम योगी आदित्यनाथ ने मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मु के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया था, तब ओम प्रकाश राजभर के साथ शिवपाल यादव भी पहुंचे थे. इसके बाद से ही दोनों के रिश्तों में खटास बढ़ गई और सपा ने बयान जारी कर सांकेतिक फटकार लगाई और उन्हें किसी भी पार्टी में जाने की स्वतंत्रता दे दी.

ठीक इसी तरह बिहार की राजनीति में भी पशुपति पारस और चिराग पासवान के रूप में चाचा-भतीजे की जोड़ी एक बार फिर से सियासी केंद्र में आ गई है. केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने चिराग पासवान को हाजीपुर से चुनाव लड़ने का खुला चैलेंज दे दिया है. चाचा पशुपति कुमार पारस ने अपने भतीजे चिराग पासवान को ललकारते हुए कहा कि उनका हाजीपुर से चुनाव लड़ना तय है. अब उनके खिलाफ चिराग पासवान आ जाएं या उनकी मां, वो तैयार हैं. जनता फैसला कर देगी. उन्होंने स्पष्ट कहा कि हाजीपुर से एनडीए का कैंडिडेट वही रहेंगे. इतना ही नहीं, बीते दिनों ही मोकामा में हुए हमलो को लेकर पशुपति पारस ने आरोप लगाया था कि उनके ऊपर चिराग पासवान ने जान लेवा हमला कराया था.

दरअसल, बिहार के इस सियासी परिवार में चाचा-भतीजे की लड़ाई तब शुरू हुई, जब लोजपा के पांच सांसद चिराग पासवान से अलग होकर उनके चाचा पशुपति पारस के खेमे में चले गए. बाद में पशुपति पारस ने पटना में खुद को लोजपा अध्यक्ष घोषित किया था. वहीं इसके बाद एनडीए की सहयोगी पार्टी होने की वजह से भाजपा ने पशुपति पारस को अपने मोदी मंत्रिमंडल में जगह दी थी. यह मामला कोर्ट में भी पहुंचा और अंत में चाचा और भतीजे को अलग-अलग नाम और सिंबल दिया गया. बीच में चाचा-भतीजा दोनों एक-दूसरे पर डायरेक्ट अटैक से बच रहे थे, मगर अब पशुपति पारस ने फिर शंखनाद कर दिया है.