मैन वसे’र्ज वा’इल्ड में पीएम मोदी ने बताया की 17 साल की उम्र में क्यों छो’रा था घर, हुई बहुत सारी बातचीत। जाने…

 डिस्कवरी चैनल के प्रसिद्ध प्रोग्राम ‘मैन वसे’र्ज वाइ’ल्ड’ का ताजा एपिसोड 180 देशों के लोगों के लिए काफी
दिलचस्प रहा जिसमें इस एपिसोड के सुपरस्टार बेयर ग्रिल्स के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नजर आए। इस प्रोग्राम में पीएम मोदी बियर ग्रिल्स के साथ मिलकर नदी के ठंडे पानी में जुगा’ड़ से बनी नाव पर सवारी की और इस एडवेंचर के माध्यम से प्रकृति संरक्षण जैसे मु’द्दों को आगे बढ़ाया। डिस्कवरी चैनल के ‘मैन वर्से’स वाइ’ल्ड विद बियर ग्रिल्स एंड प्राइम मिनिस्टर मोदी में दोनों ने उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के जंगलों में ठंड और बारिश की मा’र झेली। ग्रिल्स का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी बेहद ऊ’र्जावान और उत्साही हैं। प्रधानमंत्री ने बेयर ग्रिल्स को बताया कि जब वह 17-18 साल के थे, तभी उन्होंने घर छो’ड़ दिया था। वह दुनिया को समझना चाहते थे। उन्होंने कहा,“मुझे प्रकृति पसंद थी इसलिए हिमालय में गया। वहां के लोगों के साथ काफी वक्त बिताया और कई बड़े तपस्वियों से मिलना हुआ। ऐसे लोगों के साथ रहा जो कम से कम स्त्रोतों में अपना जीवन गुजारते हैं।”
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इस दौरान ग्रिल्स ने मजाक किया, ”आप भारत के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं और मेरा काम आपको जीवि’त रखना है। शो के मेजबान और मेहमान के बीच बातचीत के दौरान मोदी ने कहा कि लोगों के सपने पूरे करने से उन्हें खुशी मिलती है और उनका पूरा ध्यान विकास पर है। एक सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा, ”मेरे पद का नशा कभी मेरे सिर पर नहीं चढ़ता।’ ग्रिल्स के शो में इससे पहले भी सेलिब्रेटी अतिथि आ चुके हैं। इससे पहले ग्रिल्स अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ भी शो कर चुके हैं। शो के दौरान मेजबान ने प्रधानमंत्री मोदी से उनके बचपन, बतौर प्रधानमंत्री उनके सपने, जीवन में किसी चीज या बात से उन्हें कभी ड’र लगा या नहीं और क्या वह राजनीतिक रैलियों से पहने नर्व’स महसूस करते हैं जैसी बातें की। इसपर मोदी ने कहा कि नर्वस होने के बारे में वह कभी भी बेहतर जवाब नहीं दे सकते हैं क्योंकि उन्हें कभी इसका अनुभव नहीं हुआ है। मोदी ने कहा, ”मेरी दिक्कत यह है कि मैंने कभी ऐसा कोई डर महसूस ही नहीं किया है। मैं लोगों को यह समझाने में असमर्थ हूं कि नर्व’स होना क्या है और इससे कैसे निप’टें क्योंकि मेरी मूल प्रकृति बेहद सका’रात्मक है। मुझे सभी चीजों में सका’रात्मकता नजर आती है। और इसी वजह से मुझे कभी निरा’शा नहीं होती है।

इसपर ग्रिल्स ने कहा कि युवा पीढ़ी के लिए यह बहुत बड़ा संदेश है। इसपर मोदी ने कहा, ”अगर मुझे आज की युवा पीढ़ी से कुछ कहना होगा तो मैं कहूंगा कि हमें अपने जीवन को टुक’ड़ों-टुक’ड़ों में बां’ट कर नहीं दखना चाहिए। जब हम अपने जीवन में स’मग्र में देखते हैं जो उसमें उ’तार चढ़ाव दोनों होता है। अगर आप उ’तार पर हैं तो उसके बारे में ज्यादा मत सोचिए, क्योंकि ऊपर चढ़ने का रास्ता वहीं से शुरू होता है।

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जब ग्रिल्स ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने कभी प्रधानमंत्री बनने का सपना देखा था, मोदी ने कहा कि उनका ध्यान हमेशा से देश के विकास पर रहा है। उन्होंने कहा, ”मैं पहले एक राज्य का मुख्यमंत्री था। मैंने 13 साल बतौर मुख्यमंत्री काम किया है, जो मेरे लिए बिल्कुल नया रास्ता था। फिलहाल मेरे देश ने तय किया है कि मुझे यह काम करना है। इसलिए मैं इसे पिछले पांच साल से कर रहा हूं। मोदी ने कहा, ”लेकिन ध्यान हमेशा एक ही चीज पर रहा है, वह है विकास। और मैं उस काम से सं’तुष्ट हूं।  मोदी ने कहा, ”मुझे यह कभी नहीं लगा कि मैं कौन हूं। मैं इससे ऊपर उठ चुका हूं और जब मैं मुख्यमंत्री था और अब जब मैं प्रधानमंत्री हूं, मैं सिर्फ अपने काम के बारे में और अपनी जिम्मेदारियों के बारे में सोचता हूं। मेरा पद कभी मेरे सिर पर चढ़कर नहीं बोलता है।” बचपन को याद करते हुए मोदी ने कहा कि गरीबी के बावजूद उनका परिवार हमेशा प्रकृति से जुड़ा रहा। यह जुड़ाव ऐसा था कि पैसा नहीं होने के बावजूद उनके पिताजी 20-30 पोस्टकार्ड खरीदते और अपने गांव में होने वाली पहली बारिश की खबर सभी रिश्तेदारों को देते। शो के दौरान लकड़ी से भाला बनाने वाले ग्रिल्स ने प्रधानमंत्री को जंगल में रहने वाले बाघों के बारे में चेताया तो इसपर मोदी ने कहा, ”ईश्वर सबका ख्याल रखते हैं।

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मोदी ने कहा कि उनकी आस्था उन्हें किसी की जान लेने की इजाजत नहीं देती है, लेकिन वह अपने मेजबान के लिए भाला पकड़ने को तैयार हैं। मोदी ने कहा, ”आपको कभी भी प्रकृति से नहीं डरना चाहिए क्योंकि जब हमें लगता है कि प्रकृति के साथ हमारा सामंजस्य बिगड़ रहा है, समस्या वहीं से शुरू होती है। यह पूछने पर कि क्या वह अच्छे छात्र थे, इसपर मोदी ने हंसते हुए कहा, ”मैं यह नहीं कह सकता कि मैं अच्छा छात्र था। उन्होंने कहा कि गरीबी के बावजूद उन्हें साफ-सुथरी वर्दी में स्कूल जाना पसंद था और वह तांबे के लोटे में कोयला जलाकर अपने कपड़े आयरन करते थे। ग्रिल्स के सवालों पर मोदी ने तालाब से मगरमच्छ का बच्चा पकड़कर घर लाने का किस्सा भी सुनाया। प्रधानमंत्री ने कहा, ”मेरी मां ने मुझसे कहा कि यह गलत है। आप ऐसा नहीं कर सकते। आपको ऐसा नहीं करना चाहिए, इसे वापस छोड़कर आएं। मैं उसे छोड़ने वापस चला गया।