*जिला क्रिकेट में अब दिखने लगा है परिवर्तन का रंग *शहरी टीमों पर भारी पड़ रहे ग्रामीण योद्धा “

मुजफ्फरपुर (मनोज)। जिला क्रिकेट संघ के तत्वावधान में हो रहे नये प्रयोग और ग्रामीण क्षेत्रों में क्रिकेट को मिल रहे बढावा का असर अब दिखने लगा है। क्रिकेट लीग में काँटी इलेवनर और इंडियन क्रिकेट अकादमी की सशक्त प्रदर्शन, गायघाट में आइसीए का जीपीसीसी को पछाड़ना और युवा कप क्रिकेट प्रतियोगिता में संस्कृति क्लब का चैम्पियन बनने की गाथा निश्चित ही जिला क्रिकेट में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है।

जिला क्रिकेट में 90 के दशक के बाद एक ठहराव सा गया था जो कालांतर में धीरे धीरे पटरी पर लौटा। तब जिला क्रिकेट टीमहेमन ट्रॉफी, श्यामल सिन्हा u16 ,u22 आयु वर्ग में चैम्पियन बनी और u19 रंधीर वर्मा क्रिकेट प्रतियोगिता में उप विजेता रही। यह वो दौर था जब जिला क्रिकेट बिहार में अव्वल कहलाने का दावेदार था। लेकिन विडम्बना थी कि इस दौर में जिला क्रिकेट शहर में सिमट कर रह गयी थी। हालांकि 2015 -16 सत्र में इस कमी को पाटने की पहल शुरू की गयी थी लेकिन चंद शहरी टीमों के जकड़न के आगे यह प्रयास मिथक साबित होता रहा। नतीजतन जिला क्रिकेट संघ चंद हाथों की कठपुतली साबित होने लगी और ग्रामीण प्रतिभायें सिसकती रही।

बहरहाल कुंठा और विरोध के मुखर स्वर से संघ का स्वरूप घूमिल होता गया।अंततः बदलाव की उभरती चिंगारी ने जिला क्रिकेट संघ में परिवर्तन का अलख जगा गया। नयी कमेटी सत्ता में आयी और शुरू हुई बदलाव की प्रक्रिया क्रिकेट को ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ावा मिला और सिसकते पौध को अस्तित्व मिला। नतीजतन गायघाट, सकरा, मुसहरी, कटरा, साहेबगंज, काँटी, मडवन, कुढनी, पारू ,बंदरा जैसे सुदूर गांव के बच्चों में भी न्याय का विश्वास बढ़ा और वे जिला क्रिकेट में आज सिर्फ अपनी पहचान रखते हैं बल्कि जिला टीम का प्रतिनिधित्व भी कर रहे हैं।

संघ के सचिव मनोज कुमार ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में क्रिकेट को बढ़ावा देने का नतीजा है कि यहाँ की प्रतिभा ने जिला क्रिकेट में कड़ी प्रतिस्पर्धा बना दी है।जिला क्रिकेट लीग का ग्रामीण क्षेत्रों में फैलाव और प्रतिभावान खिलाड़ी को विश्वास में लेने को नये आयाम बने हैं।आज मुकेश , अनूज, टिंकू, रौशन, दिवाकर भारती, हिमांशु, शशिकांत, अमन,रौशन, आकाश, सचिन, विवेक, छोटू, प्रकाश, शानु , राहुल, धीरज आदि होनहार वीरवान जिला क्रिकेट में नया रंग भरने, जिला क्रिकेट को नया आकार देने की क्षमता रखते हैं। क्रिकेट लीग में डायमंड यंग मेन्स को काँटी इलेवन से मिली कड़ी चुनौती (दोनों पाली में 130 के अंदर आउट करना) ,जीपीसीसी को हराना और जिला स्तरीय प्रतियोगिता में आइसीए और संस्कृति क्लब जैसे ग्रामीण टीमों का शहरी टीमों क्रमशः जीपीसीसी किंग नाईन को हराकर विजेता बनना यह संकेत दे रहा है कि जिला क्रिकेट सही राह अग्रसर है।