महात्मागांधी और देशबन्धु चित्तरंजन दाश के श्रीश्रीठाकुर दर्शन

युग पुरुषोत्तम श्रीश्रीठाकुर जी के सत् दीक्षा ग्रहण करने बाद देशबन्धु चित्तरंजन सन् 1925 मई महीने में आश्रम आकर वहां से सस्त्रीक दार्जिलिंग रवाना हुए ।श्रीश्रीठाकुर जी के अमिय संग लाभ करके और उनके दिव्य गुण में मुग्ध होकर महात्मागांधी के साथ लगातार अपने इष्टदेव के गुणगान किये ।”पृथिबी में इतना लोग देखा लेकिन श्री श्री ठाकुर अनुकूलचंद्र जैसे सर्व बिषय में ऐसे असाधारण शक्तिसम्पन्न अपूर्व प्रेमिक कहीं भी नही देखा “। महात्मा जी भी स्वीकार किये थे दीक्षा ग्रहण के बाद देशबन्धु के प्रत्येक मधु मय हो उठा था ।देश बंधू महात्माजी के पास पत्र के माध्यम से अपना अनुभब जनाए थे ।

“I have learnt from my Guru (spiritual Guide )the value of the truth in all our dealings.I want you to live with him for a few days at least .Your need is not the same as mine ,but he has given me strength I did not process before .I see things clearly which I saw dimly before ”

(में मेरा गुरुदेव से व्यवहारिक जीवन का सत्य के महत्व सीखा हूँ ।आप आकर उनके साथ कुछ दिन बिताइये यह मेरा इच्छा है ।मेरा जो आवश्यकता है ,हो सकता आपका वो न हो ।लेकिन वो मुझे ऐसा शक्ति दिए है जो मेरा पहले नहीं था ।में जो अष्पष्ट भाब से देख रहा था आज वो परिष्कार देख रहा हूँ ।)
देशबन्धु के एकांत अनुरोध से महात्माजी हिमायत सतसंग आश्रम को आगमन किये थे ।उसदिन था दिनांक 29.5.1925 .। सुभह आश्रम में महात्माजी पहंचने के बाद पुष्पमाल्य से स्वागत कियागया आश्रमवासियो के द्वारा ।उसके बाद श्रीश्रीठाकुर,श्रीश्री जननी मनमोहीनी और सत्संग के कर्मिगण के साथ साक्षात किये और आश्रम के बिभिन्न कर्म प्रतिष्ठान को एक दीहात में देख कर अनेक खुस हुए ।

माता मनमोहिनी को ‘माँ’सम्बोधन करते थे ।माँ के अद्भुत ब्यक्तित्व ,अपरीसम ममता और कर्म दक्षता देखकर मुग्ध हुए थे । Young India पत्रिका में लिखे थे ।”I have never seen such such a
woman of such wonderful personality in my life .”(ऐसी विस्मयकर ब्यक्तित्व सम्पन्ना महीयसी नारी में जिंदगी में कभी नहीं देखि है )।इसके बाद महात्माजी दूसरा बार कलकत्ता सत्संग बाड़ी में श्रीश्रीठाकुर जी को साक्षात किये थे ।श्रीश्रीठाकुर उस समय असुस्थ थे ।असुस्थता के खबर पाकर देखने गए थे महात्माजी ।श्रीश्री ठाकुर अपने सिर् को महात्माजी के गोद में रख कर छोटे बच्चे की तरह शो गए ।महात्माजी यह देखकर आनन्द में हस उठे ।श्री श्री ठाकुर और सत्संग आश्रम सम्बध में सदा सर्बदा खबर रखते थे और देशबन्धु के गुरुदेव श्रीश्री ठाकुर के प्रति उनके प्रगाढ़ भक्ति और श्रद्धा था ।