छठ में माई का सख्त आदेश रहता कि जूठे हाथ से कोई सामान ना छूए – मनोज वाजपेयी

बॉलीवुड अभिनेता मनोज वाजपेयी इस छठ पर मोतिहारी स्थित अपने गांव पर नहीं हैं लेकिन घर की छठ उनकी यादों में आज भी घूम रही है। वे कहते हैं, दुनिया में चाहे जहां रहूं, लेकिन छठ पर्व आते ही मेरा मन अपने गांव बेलवा में घूमने लगता है। माई-बाबूजी का वहां रहना और भी खींचता है। अर्ध्य देने के लिए दउरा सिर पर रख मैं आगे-आगे चलता और माई पीछे-पीछे छठी मइया के गीत गुनगुनाते हुए आती।

बातचीत में उन्होंने अपने गांव की छठ की यादें साझा कीं। कहा, याद आने लगते हैं बचपन के वे दिन जब छठ की तैयारी शुरू होती थी। माई का सख्त आदेश रहता कि जूठे हाथ से कोई सामान ना छूए, अपवित्तर हो जाएगा। पाप लगेगा। छठी मइआ खिसिआ जाएंगी। आदेश का पालन करने के लिए ना जाने कितनी बार हाथ-पांव धोना पड़ता था, लेकिन कभी बुरा नहीं लगता था। छठ की पवित्रता और साफ-सफाई, सब अद्भुत होती थी।

मनोज बताते हैं कि जिस साल कोई मनौती पूरी हुई रहती, हमारी माई कोसी भरती। हमारे हिस्से गन्ना काट कर लाने और फलों को धोने का काम रहता था। सामान्य दिनों में गन्ने के खेत में जाने का मतलब होता था, गन्ना चूसना। लेकिन छठ का गन्ना क्या मजाल कि उसे हम दांत लगा दें। और इन सबके बीच छठ के गीत, जिन्हें सुनते ही मन श्रद्धा से भर जाता। उस समय टेपरिकॉर्डर जैसा विकल्प भी नहीं था। लेकिन गांव की गलियों में घुसते ही हर घर से छठ के गीत सुनाई पड़ते। याद है, अर्घ्य का दउरा लेकर घाट पर जाना। आगे-आगे हम और पीछे माई के साथ घर भर के लोग और छठ गीतों की मिठास.कांच ही के बांस के बहंगिया कुछ भी नहीं भूला हूं।