दुनिया के सबसे तेज ‘ह्यूमन कैलकुलेटर’ बने नीलकंठ भानु, भारत को दिलाया पहला गोल्ड

हैदराबाद के नीलकंठ भानु हर वक्त अंकों के बारे में सोचते रहते हैं और अब वो दुनिया के सबसे तेज ह्यूमन कैलकुलेटर हैं। महज 20 साल की उम्र में उन्होंने मेंटल कैलकुलेशन वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत को पहला गोल्ड दिलाया है।

भानु कहते हैं कि गणित दिमाग का एक बड़ा खेल है और वो गणित के फोबिया को पूरी तरह मिटाना चाहते हैं। वो मेंटल मैथ्स की तुलना स्प्रिंटिंग से करते हैं। वो कहते हैं कि तेज दौड़ने वालों पर कोई सवाल नहीं उठाता, लेकिन मेंटल मैथ्स को लेकर हमेशा सवाल उठते हैं।

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गणित के साथ भानु के इस सफर की शुरुआत पांच साल की उम्र में हुई। तब उनके साथ एक दुर्घटना हो गई थी। उनके सिर में चोट लगी और वो एक साल के लिए बिस्तर पर रहे। उन्होंने बताया कि मेरे माता-पिता को कहा गया था कि मेरे देखने-सुनने-समझने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। तब मैंने अपने दिमाग को व्यस्त रखने के लिए मेंटल मैथ्स कैलकुलेशन करना शुरू किया।

वो कहते हैं कि भारत के मध्य-वर्गीय परिवार से आने वाला शख्स आम तौर पर सोचता है कि वो एक अच्छी जॉब लेकर सेटल हो जाए या अपना कारोबार शुरू कर ले, गणित जैसे आला क्षेत्र में जाने के बारे में वो कम ही सोचता है। लेकिन अंकों की तरफ उनका रुझान ही था, जिसकी वजह से भानु ने गणित में डिग्री लेने की सोची और उनकी डिग्री पूरी भी होने वाली है।

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बड़े स्तर के अन्य प्रतियोगियों की तरह की भानु भी अपनी तैयारी को कामयाबी की वजह बताते हैं। वो कहते हैं कि “ये इतना आसान नहीं है कि आप एक टेबल पर बैठे हैं और पढ़ रहे हैं। बल्कि ये दिमाग का एक बड़ा खेल है। मैंने ना सिर्फ खुद को एक तेज गणितज्ञ के तौर पर बल्कि एक तेज सोचने वाले व्यक्ति के तौर पर भी तैयार किया है।”

बचपन में भानु स्कूल से आने के बाद छह से सात घंटे तक प्रेक्टिस करते थे। लेकिन चैंपियनशिप जीतने और रिकॉर्ड बनाने के बाद से वो हर दिन इतनी फॉर्मल प्रैक्टिस नहीं करते हैं। इसके बजाए अब वो अलग तरह से प्रैक्टिस करते हैं, जिसके बारे में वो कहते हैं कि “मैं हर वक्त अंकों के बारे में सोचता रहता हूं।”

भानु बताते हैं, “मैं तेज संगीत बजाकर प्रैक्टिस करता हूं, इस बीच लोगों से बात करता हूं, मिलता हूं और क्रिकेट भी खेलता हूं। क्योंकि इससे आपका दिमाग एक वक्त में कई सारी चीजें एक साथ करने के लिए ट्रेंड होता है।”

उन्होंने कहा कि “अपने नजदीक से गुजरने वाली हर टैक्सी के नंबर को मैं जोड़ता रहता हूं। अगर मैं किसी से बात कर रहा हूं तो मैं गिनता रहूंगा कि वो कितनी बार पलके झपका रहे हैं। सुनने में ये अजीब लग सकता है, लेकिन इससे आपका दिमाग लगातार चलता रहता है।”

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भानु कहते हैं कि “रिकॉर्ड और कैलकुलेशन बस ये बताने का तरीका है कि दुनिया को गणितज्ञों की जरूरत है और गणित हमारे लिए मजेदार होना चाहिए, लोग कहें कि ये विषय हमें बहुत पसंद है। मेरा असली मकसद है कि वो लोगों में गणित का डर खत्म कर दें।”

भानु ने अब तक चार विश्व रिकॉर्ड और कई अन्य उपलब्धियां अपने नाम की हैं। भानु के परिवार को अपने बेटे पर बहुत गर्व है। भानु ने बताया कि “जब मैंने अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता जीती तो मेरे अंकल ने कहा था कि मुझे इतना तेज बनना चाहिए, जितना आज तक कोई हो ही ना। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं सबसे तेज ह्यूमन कैलकुलेटर बन जाऊंगा।”

input : अमर उजाला