मुजफ्फरपुर: लिट्टी-चोखा, माछ-मखान का क्या कहना…. हास्य व ओज रस में डूबे शहरवासी

मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर हम क्षमनायक हैं भारत के मेधा के अवतारी है हम सौ पर भारी एक पड़े, हम धरतीपुत्र बिहारी हैं… लिट्टी-चोखा, माछ-मखान का क्या कहना…ये पक्तियां जैसे ही हास्य कवि शंभू शिखर ने सुनाई पहली से अंतिम पंक्ति तक बैठे लोग अपने हाथों को रोक नहीं सके। वहीं अपनी मिट्टी के सम्मान में शंभू शिखर की आनंदित की रचनाओं से लोगों की तालियों से पूरा मैदान गूँज उठा। मौका था अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का, जहां शाम पांच बजे से देर रात तक लोग अपने चहेते कवियों को सुनने के लिए डटे रहे।

कार्यक्रम में प्रभारी डीएम आशुतोष द्विवेदी, एसएसपी राकेश कुमार, पूर्व मंत्री सुरेश कुमार शर्मा, नगर डीएसपी राघव दयाल, उप निर्वाची पदाधिकारी सत्यप्रिय एलएस कालेज के प्राचार्य डा. ओपी राय. का डीएवी के प्राचार्य एमके झा, जदयू के जिलाध्यक्ष रामबाबू सिंह कुशवाहा, जदयू प्रदेश सचिव प्रो. शब्बीर अहमद, जदयू नेता सौरभ कुमार साहेब, पार्षद संजय केजरीवाल भाजपा नेता केशव चौबे छात्र नेता संकेत मिश्रा गौरव भारवाड संजीव साह पूर्व निगम पार्षद इकबाल कुरैशी, डा. नवीन कुमार आदि मौजूद संचालन गोपाल ने किया आयो सिन्हा टीम के साथ देर रात तक मौजूद रहे।

शनिवार को दैनिक जागरण की और से अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। आइटी मंत्री इसराइल मसूरी ने कि हास्य-व्यंग्य जीवन के अभिन्न अंग हैं। प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह बहुत जरूरी है। कहा कि देश के सर्वश्रेष्ठ कवियों को एक व पर लाकर सफल आयोजन के लिए दैनिक जागरण की टीम बधाई की पात्र है।

इससे पहले गायघाट विधायक निरंजन राय, रेडकास के प्रदेश उपाध्यक्ष उदय शंकर प्रसाद सिंह एवं उप महापौर डा. मोनालिसा ने कार्यक्रम की शुरुआत की। संपादकीय प्रभारी बृजेश दूबे ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में दैनिक जागरण ने कवि सम्मेलन की यात्रा शुरू की। आज यह साहित्य और परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं। धन्यवाद ज्ञापन दैनिक जागरण मुजफ्फरपुर के म एस.एन पाठक ने किया। मौके पर विज्ञापन प्रबंधक अभिवेद्र प्रताप नारायण प्रसार प्रबंधक प्रदीप श्रीवास्तव समेत दैनिक जागरण परिवार से जुड़े सभी सदस्य मौजूद रहे।

जो हैं इस कथा के प्राण, उनकी प्राण जानकी….ये बेटियां पापा की खातिर यम के सामने स्वयं खड़ी हो जाती हैं….सुना कर  तो कभी रचनाओं से समाज को आईना भी दिखाया एहसान कुरैशी ने मां पर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। नई पीढ़ियों को चेताया कि हम चाहे कितनी भी तरक्की कर लें, अपने संस्कारों से दूर नहीं जाना चाहिए। अपने पीछे छूट रहे मां-बाप को जरूर साथ रखें। अंत में उन्होंने कहा कि अच्छे बुरे का ध्यान रखते हैं, हम अपने अतिथि का ध्यान रखते हैं।

डा. संजीव कुमार, डायनेमिक हल्य ने बताया कि सारा जग है प्रेरणा प्रभाव सिर्फ राम है. भाव सूचियां बहुत है, भाव सिर्फ राम है, जो है इस कथा के प्राण उनकी प्राण जानकी राम एक सत्य जिसका है प्रमाण आनकी…इंदौर से पहुंचे अमन अक्षर ने जब यह पंक्तियां सुनाई तो लोग मुग्ध हो उठे। उन्होंने मां जानकी की धरा की प्रशंसा की तो सबने उनकी रचनाओं को खूब सराहा।

राजनीति पर अपने व्यग्यबाण की पैरोडी से जब कवि सुदीप भोला ने तंज कसना शुरू किया तो हर हाथ तालिया बजाने को मजबूर हो गया। उन्होंने लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य को केंद्रित करते हुए कहा कि धीरे से चुपचाप बड़ी हो जाती हैं, संबंधो की मुख्य कड़ी हो जाती है, ये पापा की परिया पापा के खातिर, यम के आगे स्वयं खड़ी हो जाती है…।

के काव्य शिखर तक पहुंचा। वहीं नैनीताल में पली बढ़ी आजमगढ़ की मूल औ तारण की जो दिशा देश को देती है, गौरी और भोला के काव्य संवाद रूप से रहने वाली गौरी मिश्रा ने अपनी पर लोग झूमने लगे। संचालन’ के रचना यह कालिदास चाणक्य धरा है दौरान सुदीप भोला ने हास्य और आर्यभट्ट के शोधों की, ससद की गलियां जय-जय बिहार, जय-जय बिहार सुनाया व्यंग्य का ऐसा फ्यूजन पेश किया है गवाह, जपी के प्रबल विरोधों की है कि बंधे हाथ भी हवा में लहराते यहीं मुक्ति का धाम गया है.भूमि तरण हम दुनिया में कहीं रहें, सीने में हिंदुस्तान रखते है। कवि सम्मेलन अमन के अक्षर से शुरू होकर शंभु नजर आए। जिन पर बिहार का है उधार, जय-जय बिहार, जय-जय बिहार….. वह मिट्टी है चंपारण की नफरत बिहार से करते वो, जिन पर बिहार का है उधार, तो अपनी मिट्टी के सम्मान में सभी ने खूब तालियां बजाई।

 

 

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