समस्तीपुर: अंदौर गांव की बेटी विष्णु मंजरी बनी जज, पिता की विरासत संभालते हुए जिले का नाम किया रोशन

जिले के लिए नवंबर का महीना उपलब्धियों से भरा रहा. क्रिकेट में जिले के युवाओं ने अपनी पहचान बनाई, वहीं शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में भी कई होनहारों ने जिले का गौरव बढ़ाया. इसी कड़ी में मोहिद्दीननगर प्रखंड के अंदौर गांव की बेटी विष्णु मंजरी ने बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर अपने पिता की न्यायिक सेवा की विरासत को आगे बढ़ाया.

पिता की राह पर चलीं विष्णु मंजरी
विष्णु मंजरी के पिता लाल बहादुर सिंह जो सेवानिवृत्त अपर जिला सत्र न्यायाधीश हैं, उन्होंने हमेशा अपनी बेटियों को न्यायिक सेवा में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया. विष्णु मंजरी ने उनके मार्गदर्शन और अपनी मेहनत के बल पर न केवल अपने पिता की इच्छाओं को साकार किया, बल्कि जिले और गांव का नाम भी रोशन किया. उन्होंने बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा में 56वीं रैंक हासिल की. विष्णु ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पटना में पूरी की, इसके बाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार, गया से एलएलबी की पढ़ाई की. उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से एलएलएम की डिग्री प्राप्त की.

‘जज साहब का गांव’ से अब ‘जज साहिबा का गांव’
लाल बहादुर सिंह की प्रतिष्ठा के कारण अंदौर गांव को पहले से ही “जज साहब का गांव” कहा जाता था. अब उनकी बेटी विष्णु मंजरी की सफलता ने इस पहचान को और ऊंचाई दी है. पूरे गांव में उत्सव का माहौल है. क्षेत्र के प्रमुख लोग जैसे जंग बहादुर सिंह, डाक अधिकारी पंकज किशोर सिंह, पुलिस निरीक्षक कमल किशोर सिंह और जन सुराज नेता राज कपूर सिंह ने विष्णु को बधाई दी है.

पिता से मिली प्रेरणा
विष्णु मंजरी ने बताया कि मुझे बचपन से ही पिता से प्रेरणा मिली. उनके कार्यकाल के किस्से सुनते-सुनते मुझे लगा कि मैं भी न्यायिक सेवा में अपना योगदान दूं. विष्णु ने बताया कि वह पढ़ाई में कभी घंटों की बाध्यता नहीं रखती थीं, बल्कि एक निश्चित रूटीन के अनुसार पढ़ाई करती थीं. वह अपने रूटीन को सप्ताहवार नोट करतीं और उसी के आधार पर तैयारी करतीं. उनका मानना है कि यह अनुशासन ही उनकी सफलता की कुंजी बना.

मां ने दी मजबूत नींव
विष्णु की मां उषा सिंह, जो खुद एक शिक्षिका हैं, ने अपनी तीनों बेटियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया. उषा सिंह ने कहा, “मेरी तीनों बेटियां मेरे लिए बेटे के समान हैं. मैंने हमेशा उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए प्रोत्साहित किया. उषा की बड़ी बेटी मीनू मनीला केनरा बैंक में मैनेजर हैं, दूसरी बेटी टिनी (टूटू) डॉक्टर हैं और अब सबसे छोटी बेटी विष्णु मंजरी जज बन गई हैं.

लाल बहादुर सिंह का गर्व और संदेश
विष्णु मंजरी के पिता, सेवानिवृत्त न्यायाधीश लाल बहादुर सिंह, ने कहा, “मैंने हमेशा अपने बच्चों को शिक्षा के प्रति गंभीर रहने और समाज सेवा के लिए प्रेरित किया. उन्होंने बताया कि वह कोर्ट में दिए गए जजमेंट के किस्से घर पर साझा करते थे, जिससे बच्चों में न्यायिक सेवा के प्रति रुचि जगी. उन्होंने अपनी बेटी को सलाह देते हुए कहा, “जज बनना सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है. हमेशा ईमानदारी और निष्पक्षता से लोगों को न्याय दिलाना.

समस्तीपुर का गौरव
विष्णु मंजरी की यह सफलता न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे समस्तीपुर जिले के लिए गर्व का विषय है. यह कहानी उस संदेश को भी मजबूत करती है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं हैं और सही दिशा और प्रेरणा मिलने पर बड़े से बड़े लक्ष्य हासिल कर सकती हैं.

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