मुजफ्फरपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: अपराध से अर्जित संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू

रिपोर्ट: अमन कुमार “मौन्टी”

मुजफ्फरपुर: अपराध के जरिए अकूत संपत्ति अर्जित करने वाले अपराधियों के खिलाफ मुजफ्फरपुर पुलिस ने बड़ा अभियान शुरू किया है। एसएसपी सुशील कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने 110 ऐसे अपराधियों की सूची तैयार की है, जिन्होंने आपराधिक गतिविधियों से संपत्ति बनाई है।

पहले चरण में चार कुख्यात अपराधियों – चुन्नू ठाकुर, कुमार रणंजय उर्फ ओंकार, पप्पू सहनी और छोटू राणा – की संपत्तियों का पूरा ब्योरा जुटाकर न्यायालय में समर्पित कर दिया गया है। जल्द ही इनकी चल-अचल संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

अपराधियों की संपत्ति जब्त करने की तैयारी

एसएसपी सुशील कुमार ने बताया कि पुलिस ने इन अपराधियों के खिलाफ ठोस सबूत जुटाए हैं। नए कानून के तहत न्यायालय से अनुमति मिलते ही उनकी संपत्तियों को जब्त कर लिया जाएगा। इन संपत्तियों में मकान, जमीन, गाड़ियां और अन्य कीमती संपत्तियां शामिल हैं। ताकि अपराधी इन्हें बेच न सकें, इसके लिए पुलिस ने सीओ ऑफिस में संपत्तियों को सीज करने के लिए आवेदन दिया है।

इन कुख्यात अपराधियों पर शिकंजा

1. चुन्नू ठाकुर (गन्नीपुर, मुजफ्फरपुर)

• 42 आपराधिक मुकदमे दर्ज, जिनमें हत्या, लूट और रंगदारी के गंभीर मामले शामिल।

• 1987 से अपराध की दुनिया में सक्रिय।

• वर्तमान में जेल में बंद।

2. कुमार रणंजय उर्फ ओंकार (मिठनपुरा, मुजफ्फरपुर, मूल निवासी बेगूसराय)

• 3 आपराधिक मुकदमे दर्ज।

• पूर्व मेयर समीर कुमार और प्रॉपर्टी डीलर आशुतोष शाही हत्याकांड में आरोपी।

3. पप्पू सहनी (पानापुर करियात, मीनापुर)

• 12 आपराधिक मुकदमे दर्ज।

• एटीएम फ्रॉड गिरोह का मास्टरमाइंड।

• वर्तमान में जेल में बंद।

4. छोटू राणा (साहेबगंज, मुजफ्फरपुर)

• दर्जनों गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज।

• हाल ही में यूट्यूबर मनी मेराज के साथी सैफुल अंसारी के घर पर गोलीबारी मामले में आया नाम।

अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने की रणनीति

एसएसपी ने कहा कि मुजफ्फरपुर पुलिस अपराध से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पुलिस का यह कदम अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने और शहर में अपराध पर लगाम लगाने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

इस कार्रवाई से जिले के अन्य अपराधियों में भी खलबली मच गई है। पुलिस की रणनीति है कि अपराध से कमाई गई संपत्ति पर लगाम लगाकर अपराधियों को आर्थिक रूप से कमजोर किया जाए, ताकि वे दोबारा संगठित अपराध को अंजाम न दे सकें।

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