नीतीश सरकार की फजीहत: 5 साल में 1 करोड़ नौकरी का लक्ष्य, पर विभाग के पास ‘जीरो’ रिपोर्ट देने की भी फुर्सत नहीं

बिहार : बिहार सरकार द्वारा आगामी 5 वर्षों (2025-30) में एक करोड़ नई नौकरी और रोजगार सृजन का जो महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है, वह सरकारी विभागों की सुस्ती के कारण अधर में लटकता नजर आ रहा है । आलम यह है कि ‘भवन निर्माण विभाग’ जैसे महत्वपूर्ण विभाग ने अब तक इस दिशा में हुई प्रगति की कोई रिपोर्ट ही उपलब्ध नहीं कराई है, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं 

चेतावनी के बाद भी सुस्त रहा विभाग

भवन निर्माण विभाग के संयुक्त सचिव अवधेश नंदन सिन्हा ने सभी अधीक्षण अभियंताओं को एक कड़ा स्मरण पत्र (रिमाइंडर) जारी किया है । पत्र में इस बात पर गहरी नाराजगी जताई गई है कि युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग द्वारा बार-बार रिपोर्ट मांगे जाने के बावजूद अब तक कोई प्रतिवेदन नहीं भेजा गया है । यह विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है कि जब सरकार एक करोड़ नौकरियों का ढिंढोरा पीट रही है, तब विभाग डेटा तक जुटाने में नाकाम हैं 

डेटा के अभाव में कैसे पूरा होगा लक्ष्य?

हैरानी की बात यह है कि 17 मार्च 2026 को ही इस संबंध में निर्देश दिए गए थे, लेकिन महीनों बीतने के बाद भी विभाग के पास दिखाने के लिए कोई आंकड़ा नहीं है । संयुक्त सचिव ने अब सख्त निर्देश दिया है कि यदि किसी माह में कोई नौकरी सृजित नहीं हुई है, तो अनिवार्य रूप से ‘शून्य’ (Zero) भरकर प्रतिवेदन भेजा जाए । इससे यह स्पष्ट होता है कि विभाग केवल कागजी खानापूर्ति में जुटा है और जमीनी स्तर पर रोजगार सृजन की रफ्तार बेहद धीमी या नगण्य हो सकती है 

15 तारीख की डेडलाइन और ‘व्हाट्सएप’ का सहारा

अब विभाग ने सभी प्रमंडलों को हर महीने की 15 तारीख तक मासिक उपलब्धि रिपोर्ट व्हाट्सएप ग्रुप और ईमेल के माध्यम से भेजने का ‘अंतिम अल्टीमेटम’ दिया है । सरकार ने इसे ‘उच्च प्राथमिकता’ देने को कहा है, लेकिन जिस तरह से पूर्व के निर्देशों की अनदेखी की गई, उसने सरकार के रोजगार संबंधी दावों की हवा निकाल दी है 

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