डायल 112 की टीम पर ONLINE घूस लेने और गा’ली देने का आ’रोप, स्मैकियर की सूचना देने पर पुलिस कर्मियों ने पी’टा

वैशाली : वैशाली में डायल 112 की पुलिस पर 1000 रुपये घूस लेकर पीड़ित को छोड़ने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित को पीटने और जातिसूचक गालियां देने का भी आरोप पुलिस लगा है। पीड़ित ने बताया कि पुलिस गाड़ी पर बिठाकर स्टेशन ले गयी जहां एक दुकान में 1000 रुपया ऑनलाइन पेंमेंट कराया और दुकानदार से कैश लेने के बाद पुलिस कर्मी ने उसे गाड़ी से लाकर घर के पास छोड़ दिया। पीड़ित अब उक्त पुलिस कर्मी पर कार्रवाई की मांग कर रहा है।

बताया जाता है कि वैशाली जिले के महनार थाना क्षेत्र अंतर्गत देशराजपुर बजरंगबली चौक के कुछ लोग नशा कर रहे थे। नशा करने से रोकने पर कुछ युवकों ने 45 वर्षीय एक व्यक्ति की बेरहमी से पिटाई कर दी। पीड़ित ने जब इस बात की सूचना पुलिस को दी, तब डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची जरूर लेकिन पीड़ित की बात सुनने के बजाय उल्टे थप्पड़ जड़ दिया और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर गालियां दी गयी। इससे भी मन नहीं भरा तो गाड़ी में बिठाकर ले स्टेशन ले गया और वहां एक दुकान में 1000 रुपये घूस ऑनलाइन करने को कहने लगा। पीड़ित ने बताया कि वह दो बार में एक हजार रुपया ऑनलाइन किया जिसके बाद दुकानदार से पुलिस कर्मी ने एक हजार रुपया लिया उसके बाद उसे घर के पास वार्निंग देकर छोड़ दिया गया।

यह घटना बीते देर रात करीब 10 बजे की है। पीड़ित की पहचान देशराजपुर बजरंगबली चौक निवासी गणेश राम के पुत्र धर्मेंद्र राम के रूप में हुई है। धर्मेंद्र ने बताया कि उन्होंने गांव के बच्चों को सूखे नशे की दलदल में फंसने से रोकने के लिए कुछ लड़कों को नशा करने से मना किया था, जिसके बाद लड़कों ने उनकी पिटाई कर दी।

मारपीट के बाद धर्मेंद्र राम ने तत्काल डायल 112 और महनार थाने की पुलिस को सूचना दी। पुलिस घटनास्थल पर पहुंची, लेकिन तब तक आरोपी लड़के भाग चुके थे। आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के बजाय धर्मेंद्र राम को ही अपनी गाड़ी में बैठा लिया। धर्मेंद्र राम का आरोप है कि पुलिस उन्हें अस्पताल ले जाकर इलाज कराने के बजाय करीब 5 किलोमीटर दूर महनार स्टेशन के पास तक घुमाती रही। वहां पुलिसकर्मियों ने उन्हें पीटा और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गाली-गलौज भी की।

धर्मेंद्र ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें होश में रहने की धमकी दी और कहा कि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उन्हें थाने में बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद पुलिस ने उनसे एक हजार रुपये की मांग की। धर्मेंद्र के पास नकद रुपये नहीं होने पर पुलिस ने स्टेशन स्थित दुकानदारों से यूपीआई ट्रांजेक्शन के जरिए नकद मंगवाकर एक हजार रुपये लिए और फिर उन्हें छोड़ा।

धर्मेंद्र के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने उन्हें यह भी चेतावनी दी कि वे आगे से नशा करने वालों की सूचना पुलिस को न दें, अन्यथा उनका जीवन बर्बाद कर दिया जाएगा। जब पुलिस धर्मेंद्र राम को उनके घर छोड़ने आई, तो परिजनों ने पुलिस का ही बंधक बना लिया और हंगामा शुरू कर दिया। परिवार के लोग पुलिस की गाड़ी के सामने लेट गए।  पुलिस कर्मी पैसा वापस करने को तैयार हो गये लेकिन पीड़ित दोषी पुलिस कर्मी पर कार्रवाई की मांग पर अड़ा रहा। इस बात को लेकर घंटों हो हंगामा होता रहा। महनार थानाध्यक्ष के घंटों समझाने-बुझाने के बाद मामला शांत हो सका।

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