तेजी से बदलता बिहार, PNG कनेक्शन ने पकड़ी रफ्तार, हर महीने नया रिकॉर्ड,पटना टॉप, मुजफ्फरपुर आगे,इन जिलों में गैस कनेक्शन की रेस तेज

बिहार: बिहार में एनर्जी सेक्टर का मंजर तेजी से बदल रहा है और अब यह बदलाव सिर्फ कागज़ों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीनी हक़ीकत बन चुका है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की सदारत में हुई क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की अहम बैठक में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के फैलते दायरे और इसकी रफ्तार पर तफ़सीली गौर किया गया।

हुकूमत के मुताबिक 26 अप्रैल 2026 तक राज्य में 1,06,835 घरेलू PNG कनेक्शन लाइव हो चुके हैं यानी लगभग 1.07 लाख का आंकड़ा पार। सहरसा में गैस सप्लाई शुरू होने के साथ ही अब बिहार के 19 जिले गैसीफाइड हो चुके हैं, जो कुल जिलों का करीब 50 फ़ीसदी है। यह कामयाबी इस बात का सबूत है कि बिहार एनर्जी ट्रांज़िशन की राह पर तेज़ी से बढ़ रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि जहाँ पहले हर महीने 3,000 से 3,500 कनेक्शन दिए जाते थे, वहीं अब अप्रैल 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 9,132 तक पहुंच गया है और जल्द ही इसे 12,000 प्रति माह तक ले जाने का मंसूबा तैयार है।

जिलों की बात करें तो पटना में GAIL के जरिए 33,539 कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि मुजफ्फरपुर में IOCL ने 16,970 कनेक्शनों के साथ अग्रणी भूमिका निभाई है। भोजपुर, पूर्णिया और सारण जैसे जिलों में भी PNG का विस्तार संतोषजनक पाया गया।

खास तौर पर मुजफ्फरपुर का ‘धरफरी एन्क्लेव’ राज्य की पहली “LPG Free” सोसाइटी बनकर एक नई मिसाल कायम कर चुका है। वहीं, बांका, बक्सर, दरभंगा और मधुबनी जैसे गैर-गैसीफाइड जिलों में पाइपलाइन बिछाने का काम जोर-शोर से जारी है। उम्मीद है कि बांका में 30 अप्रैल तक गैस सप्लाई शुरू हो जाएगी, जबकि दरभंगा और मधुबनी में जुलाई-अगस्त तक यह सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है।

मुख्य सचिव ने साफ निर्देश दिए कि कनेक्शन की रफ्तार दोगुनी की जाए, प्लंबर और ठेकेदारों की तादाद बढ़ाई जाए और वार्ड स्तर पर कैंप लगाकर लोगों को जागरूक किया जाए। कुल मिलाकर, बिहार अब क्लीन एनर्जी की तरफ तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है जहाँ हर घर तक सुरक्षित, सस्ती और सुविधाजनक गैस पहुंचाने का ख्वाब अब हकीकत बनने लगा है।

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