सिवान में खाकी पर दाग: गोरियाकोठी थानाध्यक्ष पर युवक को थाने बुलाकर बे’रहमी से पी’टने का आ’रोप, SP से शिकायत

सीवान : जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। जहां पुलिस पर बर्बरता करने का आरोप लगा है। मामला जिले के के गोरियाकोठी थाना क्षेत्र का है। मामला अब पुलिस अधीक्षक तक पहुंच गया है।

थानाध्यक्ष पर थाने बुलाकर बेरहमी से पिटाई का आरोप

गोरियाकोठी थाना क्षेत्र के ग्राम मुस्तफाबाद निवासी 21 वर्षीय युवक गुलाम गौस अंसारी ने थानाध्यक्ष मनीष कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें थाने बुलाकर न केवल लाठियों से पीटा गया, बल्कि अभद्र भाषा का प्रयोग कर मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया गया। पीड़ित ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत सिवान पुलिस अधीक्षक (SP) से करते हुए न्याय की गुहार लगाई है।

आपसी सुलह पर भड़का थानाध्यक्ष

दरअसल घटना की पृष्ठभूमि 28 अप्रैल को बच्चों के खेल के दौरान हुए एक मामूली विवाद से जुड़ी है। पीड़ित के अनुसार विवाद को दोनों पक्षों ने आपसी सहमति और बुजुर्गों की सलाह पर सुलझा लिया था और थाने से अपने आवेदन वापस ले लिए थे। आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर थाना अध्यक्ष ने 30 अप्रैल को युवक को थाने बुलाया। युवक का कहना है कि जैसे ही वह पहुँचा, उसका मोबाइल छीन लिया गया और थाना अध्यक्ष ने यह कहते हुए उसकी पिटाई शुरू कर दी कि “गाँव में नेता बनते हो और केस सुलह करवाते हो।”

झूठे केस में फंसाने की धमकी

पीड़ित गुलाम गौस ने अपने आवेदन में बताया कि थाना अध्यक्ष ने उसे एक कमरे में ले जाकर लाठियों से बेरहमी से पीटा, जिससे उसके शरीर के पिछले हिस्से में गंभीर चोटें आई हैं। युवक को करीब दो घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया और भविष्य बर्बाद करने की धमकी भी दी गई। इस घटना के बाद पीड़ित ने गोरियाकोठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपना इलाज कराया, जहाँ के मेडिकल दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से ‘Physical Assault’ (शारीरिक हमला) दर्ज किया गया है।

शिकायती पत्र में पीड़ित ने एक महत्वपूर्ण साक्ष्य का हवाला देते हुए कहा है कि थाने में लगे ताबिश इरशाद की रिपोर्ट में यह पूरी घटना कैद है। उन्होंने SP से मांग की है कि फुटेज की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस प्रकार कानून के रक्षक ने ही कानून को हाथ में लिया। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस की यह कार्यशैली न केवल गैरकानूनी है, बल्कि मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन भी है।

अब जिले भर की नजरें पुलिस अधीक्षक के रुख पर टिकी हैं। यह मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है और पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यदि CCTV फुटेज और मेडिकल रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह गोरियाकोठी थाना अध्यक्ष के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है। फिलहाल, पुलिस विभाग की ओर से इस मामले पर किसी आधिकारिक कार्रवाई की सूचना का इंतजार है।

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