मुजफ्फरपुर: मुज़फ्फरपुर की पहचान शाही लीची की मिठास से है और अब इसी पहचान को स्थानीय कला, हुनर और रोजगार से जोड़ते हुए लीचीपुरम सांस्कृतिक पुनर्जागरण अभियान लगातार नई पहल कर रहा है। पर्यावरणविद एवं अभियान के संस्थापक सुरेश गुप्ता की पहल पर विनीता सिंह ने सुजनी कला के माध्यम से बेहद आकर्षक लीचीपुरम आर्ट तैयार किया है, जो मुज़फ्फरपुर की सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय हुनर का सुंदर संगम नजर आता है।


सुधा हस्त उद्योग की संस्थापक विनीता सिंह ने बीपीएससी शिक्षक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद नौकरी छोड़कर कला और हस्तशिल्प को अपना समर्पण दिया और आज सुजनी कला, कोच्चि कला और कैंडल वर्क के जरिए स्थानीय कलाकारों और हस्तशिल्प को एक नई पहचान देने का सराहनीय प्रयास कर रही हैं।


उनके द्वारा तैयार की गई खूबसूरत लीचीपुरम आर्ट सुजनी शॉल में लीची की मिठास और मीठी मुस्कान के भाव को बेहद खूबसूरती से पिरोया गया है। यह शॉल महज एक कलात्मक उत्पाद नहीं, बल्कि मुज़फ्फरपुर की मिट्टी, यहां की कला और हुनरमंद हाथों के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

लीचीपुरम अभियान का उद्देश्य भी यही है कि स्थानीय उत्पादों को अपनाकर हम कलाकारों के हुनर को प्रोत्साहन दें, रोजगार के अवसर बढ़ाएं और अपनी पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाएं। सचमुच, “लोकल प्राइड–ग्लोबल राइड” की सोच को साकार करने वाली ऐसी पहल मुज़फ्फरपुर की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाई देने का काम कर रही है। लीची बचाने, स्थानीय कला अपनाने, रोजगार बढ़ाने और मीठी मुस्कान फैलाने की यह पहल निश्चित रूप से सराहना की हकदार है।
