पटना: बिहार के अनुदानित और वित्त रहित विद्यालय एवं महाविद्याल के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी खबर है. सीएम सम्राट चौधरी की सरकार ने इन विद्यालयों और महाविद्यालयों के लिए ₹461 करोड़ की वित्तीय सहायता को मंजूरी दे दी है. इस फैसले की आधिकारिक घोषणा सम्राट चौधरी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए दी है.

पारदर्शिता के लिए बनेगी कमेटी
इस राशि का सीधा लाभ उन शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मियों को मिलेगा जो लंबे समय से मानदेय और बकाए का इंतजार कर रहे थे. सरकार ने साफ किया है कि इस बजट का वितरण पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाएगा. इसके लिए एक विशेष समिति का गठन भी किया जा रहा है, जो अनुदान के सही इस्तेमाल और वितरण की निगरानी करेगी.

आर्थिक पैकेज का कहां होगा उपयोग?
जानकारी के अनुसार, वित्तीय तंगी से गुजर रहे कई शैक्षणिक संस्थानों में स्टाफ के वेतन वितरण का काम लंबे समय से बाधित चल रहा था. ऐसी विषम परिस्थिति में, सरकार द्वारा स्वीकृत यह बड़ी आर्थिक सहायता इन संस्थानों के लिए एक बड़ा संबल साबित होगी.

आर्थिक संकट से गुजर रहे वित्त रहति शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मी
इस सरकारी मदद की मुख्य विशेषता यह है कि यह पूरी धनराशि केवल शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक स्टाफ के वेतन तथा मानदेय के भुगतान पर ही खर्च की जाएगी.

माना जा रहा है कि 461 करोड़ रुपए के इस विशेष बजटीय प्रावधान से न सिर्फ शिक्षण संस्थानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी, बल्कि कर्मचारियों के बकाया वेतन का निपटारा भी तेजी से हो सकेगा.

