पटना में दवा की दुकान से चल रहा था शराब का खेल! छापेमारी में बी’यर-श’राब की बोतलें देख अफसर भी रह गए हैरान

पटना में शराबबंदी के बीच धंधेबाजों ने शराब बेचने का ऐसा रास्ता तलाश लिया, जिसे देखकर कार्रवाई करने वाली टीम भी हैरान रह गई। कंकड़बाग की पीसी कॉलोनी में बाहर से यह एक सामान्य दवा की दुकान नजर आ रही थी, लेकिन जब ड्रग कंट्रोलर की टीम ने अचानक छापा मारा तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए। दुकान में दवाओं के बीच शराब और बीयर की बोतलें मिलीं। इतना ही नहीं, जांच के दौरान एक्सपायर दवाएं भी बरामद हुई।

मामला पीसी कॉलोनी के डी-167 स्थित मेसर्स सेलुलस फार्मा प्राइवेट लिमिटेड का है। शुक्रवार को राज्य औषधि नियंत्रक की टीम ने कंकड़बाग थाने की पुलिस के साथ मिलकर प्रतिष्ठान का औचक निरीक्षण किया। दुकान के मालिक मृत्युंजय कुमार सिंह उस समय परिसर में मौजूद थे। टीम ने जैसे-जैसे दुकान की जांच शुरू की, वैसे-वैसे कई अनियमितताएं सामने आती चली गईं।

सबसे पहले दवाओं से जुड़े रिकॉर्ड और जरूरी दस्तावेज मांगे गए। लेकिन प्रतिष्ठान की ओर से दवाओं की खरीद-बिक्री से संबंधित आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए जा सके। जांच टीम को दुकान पर लाइसेंस की शर्तों के अनुरूप साइनबोर्ड भी प्रदर्शित नहीं मिला। इसके अलावा दवाओं के भंडारण की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई। जांच में एक और गंभीर गड़बड़ी सामने आई। प्रतिष्ठान के पास सिर्फ एक कमरे के लिए ड्रग लाइसेंस था, जबकि दुकान में दवाएं चार कमरों में रखी गई थीं। यानी जिस जगह पर दवाओं का भंडारण और कारोबार हो रहा था, उसका बड़ा हिस्सा लाइसेंस की शर्तों के दायरे से बाहर था।

इसके बाद टीम ने जब दवाओं की जांच की तो दो एक्सपायर दवाएं जब्त की गईं। वहीं सात अलग-अलग दवाओं के नमूने भी संग्रहित किए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा जाएगा। औषधि विभाग ने प्रतिष्ठान संचालक को आवश्यक अभिलेख पांच दिनों के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।लेकिन इस कार्रवाई का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा अभी सामने आना बाकी था।औषधि विभाग की टीम जब प्रतिष्ठान के अंदर जांच कर रही थी, तभी परिसर में बड़ी संख्या में शराब की बोतलें दिखाई दीं। दवा की दुकान के भीतर बीयर और शराब देखकर अधिकारी भी भौंचक्के रह गए। मामला सिर्फ दवाओं में अनियमितता तक सीमित नहीं था, बल्कि यहां शराब के अवैध कारोबार का भी संदेह सामने आ गया।

राज्य औषधि नियंत्रक ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस और उत्पाद विभाग को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शराब से जुड़े मामले में कार्रवाई शुरू कर दी। जांच के बाद पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। साथ ही दुकान के मुख्य द्वार को सील कर दिया गया।अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दवा की दुकान की आड़ में शराब का यह कारोबार कब से चल रहा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। क्या दुकान से शराब की बिक्री सीधे ग्राहकों को की जाती थी या फिर यहां से शराब की सप्लाई किसी दूसरे नेटवर्क तक पहुंचाई जाती थी? पुलिस इन तमाम बिंदुओं पर जांच कर रही है।

बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद शराब की बिक्री, भंडारण, परिवहन और सेवन पर कानूनी रोक है। इसके बावजूद शराब के अवैध कारोबार से जुड़े लोग लगातार नए-नए तरीके आजमाते रहे हैं। कभी फल और सब्जियों के बीच शराब छिपाकर ले जाने का मामला सामने आता है, तो कभी बालू-गिट्टी या दूसरे सामानों की आड़ में शराब की खेप पहुंचाई जाती है। अब पटना में दवा की दुकान से शराब मिलने की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शराब माफिया कानून की निगरानी से बचने के लिए किस हद तक नए रास्ते तलाश रहे हैं।

इस मामले में एक तरफ ड्रग विभाग दवा कारोबार से जुड़ी अनियमितताओं की जांच कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस और उत्पाद विभाग शराब के अवैध कारोबार के नेटवर्क का पता लगाने में जुटे हैं।फिलहाल तीन लोगों की गिरफ्तारी और दुकान को सील किए जाने के बाद इलाके में हड़कंप है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी स्पष्ट होगा कि दवा की दुकान में शराब का यह खेल कितने समय से चल रहा था और इसके पीछे सिर्फ स्थानीय स्तर का कारोबार था या कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था।

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