पटना: शारदीय नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचयिता माना जाता है. कहा जाता है कि जब चारों ओर अंधकार था और सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब माता ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी. मां कूष्मांडा की आराधना से बुद्धि, विवेक, कौशल और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की मान्यता है. माता की उपासना से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं.

आरोग्यता और शक्ति का प्रतीक
ज्योतिषाचार्य पंडित राजन उपाध्याय ने बताया कि माता की पूजा करने से साधक में कर्म के प्रति समर्पण बढ़ता है और आरोग्यता की प्राप्ति होती है. मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं. उनके इस स्वरूप को शक्ति, सृजन और कर्म की प्रधानता का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता अपने भक्तों को आयु, आरोग्य और सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं. उनकी उपासना से साधक को मानसिक बल, बुद्धि और कार्य करने की अद्भुत क्षमता प्राप्त होती है.

नारंगी फूल और मालपुए का भोग
माता कूष्मांडा की पूजा में फूल, फल, अक्षत, रोली और दीप आदि अर्पित किए जाते हैं. पंडित राजन उपाध्याय ने बताया कि माता को नारंगी रंग विशेष प्रिय है. ऐसे में भक्त नारंगी अथवा पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा कर सकते हैं. माता को अड़हुल, गेंदा और अन्य लाल रंग के फूल चढ़ाने चाहिए. पूजा के दौरान मधु और मालपुआ का भोग लगाने का विधान बताया गया है. श्रद्धापूर्वक भोग अर्पित करने से आरोग्यता की कामना पूरी होती है.

मंत्र जाप का विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य पंडित राजन उपाध्याय ने बताया कि मां कूष्मांडा की पूजा के दौरान ‘ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः’ मंत्र का जाप करना चाहिए. इस मंत्र के साथ माता का ध्यान कर पुष्प और भोग अर्पित करना चाहिए. उन्होंने बताया कि नवरात्र के सभी नौ दिनों में नवार्ण मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’ का जाप भी विशेष महत्व रखता है. भक्तों को प्रतिदिन कम से कम 108 बार इस मंत्र का जाप करना चाहिए. वहीं, 16 माला जाप करना अधिक श्रेयस्कर माना गया है.

पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
पंडित राजन उपाध्याय ने बताया कि वाराणसी पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि पर पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त हैं. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4.30 बजे से 5.18 बजे तक रहेगा. इसके बाद सुबह 5.55 बजे से 11.43 बजे तक अभिजीत मुहूर्त बताया गया है. दोपहर 2 बजे से 2.48 बजे तक विजय मुहूर्त रहेगा. उन्होंने बताया कि राहुकाल सुबह 11.44 बजे से दोपहर 1.11 बजे तक रहेगा. इस दौरान पूजा करने से बचना चाहिए. अन्य बताए गए समय में श्रद्धालु पूजा कर सकते हैं.

