पटना जिले के बैकठपुर गांव का गौरीशंकर मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। श्रावण मास में लाखों श्रद्धालु यहां जल च’ढ़ाने पैदल ही पटना, फतुहा, बख्तियारपुर और बाढ़ से आते हैं। यह मंदिर से कई किवदंतियां जुड़ी हैं। मंदिर का इतिहास महाकाव्यों पुराणों, जातक ग्रथों एवं यात्रा वृ’तांत में मिलता है। रामायण में बैकठपुर मंदिर की चर्चा है। उस वक्त यह जगह बैकुं’ठ वन के रूप में जाना जाता था।

रामायण के अनुसार भगवान राम ने रावण को लंका में जाकर मा’रा था तो उन्होंने ब्राह्मण ह’त्या का दो’ष मि’टाने के लिए बैकुं’ठ वन के इस गौरीशंकर मंदिर में पूजा की थी। वे गंगा के पार जिस जगह ठहरे थे वह राघवपुर कहलाया, जो कालांतर में राघोपुर हो गया (वैशाली जिले में स्थित है)। मंदिर गंगा नदी के तट पर स्थित है। जगतगुरु पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद जी महाराज ने वर्ष 2007 में मंदिर में कई दिनों तक प्रवास किया था।

मंदिर की वर्तमान ब’नावट मुगलकालीन शैली की है। इसका जीर्णोद्धार मुगल बादशाह अकबर के सेनापति राजा मानसिंह ने कराया था। राजा जरासंध प्रतिदिन यहां पूजा करने आता था. मंदिर में स्थापित शिवलिंग अ’नोखा है। इस मंदिर में माता पार्वती भगवान भोलेनाथ के साथ एक ही शिवलिंग में समाहित हैं। इसके अलावा इसमें छोटे-छोटे 108 शिवलिंग उकेरे गये हैं।


Input: Hindustan