
NEW DELHI : चीन से बढ़ते तना-तनी के बीच केंद्र सरकार ने कल एक बडा फै’सला लेते हुए तत्काल प्रभा’व से 59 चाइनीज ऐप्स पर प्रतिबं’ध लगा दिया है. इन ऐप्स की सूची में टिक टॉक और यूसी ब्राउजर समेत कई लोकप्रिय ऐप्स भी शामिल हैं. इन ऐप्स पर प्रतिबं’ध लगने से कुछ लोग खुश हैं वही कुछ का कहना है कि इस तरह के प्रतिबं’ध से कोई फ’र्क पड़ने वाला नहीं है. पर क्या आप जानते हैं भारतीय स्टार्टअप में चीनी कंपनियों का बड़ा नि’वेश है. डेटा और एनालिटिक्स फर्म Global Data के आंकड़ों के अनुसार बीते चार सालों में भारतीय स्टा’र्टअप में चीन की तरफ से इन्वे’स्टमेंट में 12 गुना की वृ’द्धि द’र्ज की गई है. पिछले वर्ष चीन की कंपनियों का नि’वेश बढ़कर 4.6 बिलियन डॉलर हो गया था.

सरकार द्वारा 59 चाइनीज ऐप्स पर प्रतिबं’ध लगा दिया गया है पर उन कंपनियों के बारे में सरकार ने अपनी स्थिति अस्पष्ट नहीं की है जिन में चीन की तरफ से बड़ा नि’वेश किया गया है. चीनी निवेश वाले इन कंपनियों की भारत में बहुत प’कड़ है. इन कंपनियों की लिस्ट में स्नैपडील, स्विगी, उड़ान, जोमैटो, बिग बास्केट, बायजू, डेलहीवेरी, फ्लिपकार्ट, हाइक, मेकमायट्रिप, ओला, ओयो, पेटीएम, पेटीएम मॉल, पालिसी बाजार जैसे प्रमुख कंपनी शामिल है.

ग्लोबलडाटा के मुताबिक 24 भारतीय स्टा’र्टअप्स में से 17 स्टार्टअप में चीन की अलीबाबा और टेंसेंट जैसी कम्पनियों ने कॉरपोरेट नि’वेश कर रखा है. अलीबाबा और उसकी सहयोगी कंपनी ने पेटीएम, स्नैपडील, बिगबास्केट और जोमैटो में 2.6 बिलियन डॉलर का निवे’श है. वहीं, टेंसेंट ने ओला, स्विगी, हाइक, ड्रीम 11 और बायजू में 2.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवे’श कर रखा है.

ग्लोबलडाटा के प्रमुख प्रौद्योगिकी विश्लेषक, किरण राज के अनुसार पहले भारत-चीन के स’म्बन्ध अच्छे थे इस वजह से चीन ने भारतीय बाजार में कम समय में स्टा’र्ट-अप में काफी नि’वेश किया था. एक अनुमान के मुताबिक, एक अरब डालर से अधिक मूल्य वाली 30 में से 18 स्टा’र्टअप्स कंपनियों में चीन की प्रमुख हि’स्सेदारी है. पर हाल में भारत-चीन सीमा तनाव के चलते भारत में एफडीआई (FDI) के नियमों को और क’ड़ा करने वाली है इस वजह से भारतीय बाजार में निवे’श में अब इन कंपनियों को दि’क्कत का सा’मना करना पड़ सकता है.

जनता चीन के सामानों और कंपनियों को बै’न करने की मांग कर रही है और सरकार का फो’कस चीन पर निर्भ’रता कम करने को लेकर है। मोदी सरकार आत्मनि’र्भर भारत का ना’रा बुलं’द कर रही है। ऐसे में डेटा और एनालिटिक्स फर्म Global Data के आं’कड़ों के बारे में गंभी’रता से वि’चार करना सरकार के लिए जरू’री हो गया है.


