बिहार । ऐसा गांव जहां खास ढंग से खेली जाती होली, इसकी खूब हो रही तारीफ

पूर्वी चंपारण। एक ऐसा गांव, जहां फूलों की होली होती है। लोग रंग और गुलाल की जगह एक-दूसरे पर फूलों की पंखुडिय़ां बरसाते हैं। पूर्वी चंपारण के हरसिद्धि प्रखंड के भादा गांव में बीते तीन वर्षों से ऐसी होली खेली जा रही है।

कहीं गेंदे का फूल बरसता है तो कहीं गुलाब का। फूलों की खुशबू से होली का एक अलग रंग दिखता है। खान-पान में भी सात्विक रूप दिखता है। ग्रामीण इस दिन मांसाहार से परहेज करते हैं।

पुष्प वर्षा कर खिलाते सूखा मेवा

इस गांव के लोग भी रंग और गुलाल से होली खेलते थे। वर्ष 2018 में 14 वर्षीय सचिन कुमार के मुंह पर दोस्तों ने इतना रंग और गुलाल लगा दिया कि वह बेहोश हो गया।

होली के दिन छुट्टी होने के कारण घरवालों को इलाज के लिए काफी परेशान होना पड़ा था। काफी मशक्कत के बाद उसकी जान बच पाई थी। तब से गांव के लोगों ने आम सहमति से निश्चय कर लिया कि वे रंग और गुलाल की होली नहीं खेलेंगे।

गांव में मुस्लिम परिवारों की भी अच्छी-खासी संख्या है। फूलों की होली में सभी शामिल होते हैं। 12 बजे के बाद लोग गांव भ्रमण के लिए निकलते हैं। इस दौरान एक-दूसरे के सिर पर पुष्प छिड़कते और सूखा मेवा खिलाकर गले मिलते हैं।

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