मुजफ्फरपुर। सनातन धर्मावलंबियों के नवसंवत्सर के प्रथम मास चैत्र में वासंतिक नवरात्र का चैत्र शुक्ल प्रतिपदा शनिवार दो अप्रैल को कलश स्थापना से आरंभ होगा। इसी दिन हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2079 का भी आरंभ होगा।
ब्रह्म पुराण के अनुसार ब्रह्मा ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन से सृष्टि का आरंभ किए थे। पंडितों का कहना है कि चैत्र नवरात्र में मां दुर्गा का आगमन अश्व पर हो रहा है वहीं विदाई भैंस पर होगी। अश्व पर मां दुर्गा के आगमन होने से राजनीति के क्षेत्र में उथल-पुथल की संभावना रहेगी वहीं चैत्र शुक्ल दशमी तिथि सोमवार दिन होने से भैंस पर मां दुर्गा की विदाई होने से देश में रोग-शोक, अकारण मृत्यु, प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति बनने की संभावना है।
चैत्र नवरात्र के दौरान ग्रह-गोचरों का शुभ संयोग बनेगा। इस नवरात्र में चार सर्वार्थ सिद्धि, सात रवियोग तथा एक रविपुष्य योग होने महत्ता बढ़ गई है। इस संयोग में मां भगवती की पूजा अर्चना करने के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से घरों में सुख-शांति व समृद्धि बनी रहती है। नवरात्रि के मौके पर मकर राशि में न्यायप्रिय शनि, मंगल के साथ कुंभ राशि में गुरु, मीन राशि में सूर्य व बुध का गोचर होने पराक्रम में वृद्धि, कार्य में सफलता मिलेगी।
नवरात्र के दौरान मां भगवती की पूजा अर्चना के दौरान उपासक नियम का पालन करना होता है। वाणी में संयम, शुद्ध व सात्विक आहार ग्रहण करने से गर्मी के दिनों में स्वास्थ्य लाभ मिलता है। नवरात्र को सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है। चैत्र शुक्ल महानवमी दिन रविवार 10 अप्रैल को रवि पुष्य के पुण्य कारी योग में रामनवमी मनाई जाएगी।
इस दिन मां भगवती की विशेष रूप से पूजा अर्चना करने के साथ भगवान राम की अराधना श्रद्धालुओं की सारी मनोकामना पूर्ण करेगी। इस दिन भूमि-भवन की खरीदारी, पूंजी निवेश, वाहन, रत्न व आभूषण की खरीदाने का उत्तम समय है।


