
PATNA : पटना विश्वविद्यालय सेंट्रल लाइब्रेरी की दो लाख 75 हजार पुस्तकें अप्रैल तक डिजिटल हो जाएंगी। कई दुर्लभ पांडुलिपियों और पुरानी किताबें भी डिजिटल रूप में पाठकों के लिए सुलभ हो जाएंगी। इसके लिए गुरुवार को तीन एजेंसियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने प्रेजेंटेशन दिया। पुस्तकों को स्कैन कर डिजिटल रूप देने वाली एजेंसी का नाम 15 जनवरी तक फाइनल कर लिया जाएगा। अप्रैल तक सभी पुस्तकों को स्कैन कर डिजिटल करने का लक्ष्य रखा गया है।
सेंट्रल लाइब्रेरी के इंचार्ज प्रो. रबींद्र कुमार ने बताया कि डिजिटलाइजेशन के दौरान पुरानी किताबों के संरक्षण पर भी कार्य किया जाएगा। लाइब्रेरी में हजारों दुर्लभ पांडुलिपियां और किताबें हैं। सेंट्रल लाइब्रेरी के शताब्दी वर्ष पर सभी पुस्तकों का डिजिटलाइजेशन सबसे बड़ा तोहफा होगा। प्रेजेंटेशन के दौरान पुस्तकालाध्यक्ष प्रो. रबीद्र कुमार, रजिस्ट्रार कर्नल मनोज मिश्रा, प्रॉक्टर डॉ. जीके पलई, डिजिटल लाइब्रेरी के नोडल पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार झा, फाइनांस ऑफिसर नरेंद्र प्रसाद सिन्हा आदि मौजूद थे।

विशेषज्ञों ने बताया कि सभी किताबों की कोडिंग की जाएगी। एक-एक पेज अलग-अलग कर स्कैन किया जाएगा। प्रत्येक पेज की अलग-अलग सब कोडिंग होगी। इससे छात्र अपनी- अपनी पसंद के अनुसार एक बार में कई पेज आगे का मैटर देख सकेंगे। स्कैनिंग के बाद कोर्स व संकाय सहित पुस्तकों का वर्गीकरण होगा। इससे छात्रों को अपने पंसद की पुस्तक तुरंत मिल जाएगी। डिजिटलाइजेशन प्रक्रिया में लाखों रुपये खर्च होंगे।

सभी किताबें डिजिटलाइज हो जाने के बाद छात्रों के लिए सुलभ होंगी। एक क्लिक पर छात्र कोई भी किताब देख सकेंगे। पूरी तरह से डिजिटलाइज होने पर छात्रों व शिक्षकों को यूजर आइडी और पासवर्ड उपलब्ध कराया जाएगा। इसके माध्यम से सभी किताबों को देख सकेंगे। पीयू सेंट्रल लाइब्रेरी में लैला-मजनूं की प्रेम कहानी की पांडुलिपि के साथ-साथ कई सौ साल पुरानी हाथ से लिखी रामायण, महाभारत तथा सिख, जैन व बौद्ध धर्म से जुड़ी पुस्तकें भी हैं। डिजिटल रूप देने के बाद ये पाठकों के लिए सुलभ हो जाएंगी।
