पटना : छठ महापर्व शुक्रवार को ‘नहाय-खाय’ के साथ आरंभ हाे रहा है। इस अवसर पर बिहार के कुछ छात्रों व कलाकारों ने गंगा नदी पर 21 फीट लंबी व 15 फीट चाैड़ी छठ पूजा पेंटिंग बनाई है।
छठ पूजा वैसे तो हर जगह होती है, लेकिन बिहार, झारखंड व पूर्वी उत्तर प्रदेश में इससे लोक आस्था गहरी जुड़ी है। यह चार दिवसीय महापर्व शुक्रवार को ‘नहाय खाय’ के साथ आरंभ हो रहा है।
शनिवार को ‘खरना’ है तो रविवार को सायंकालीन अर्घ्य दिया जाएगा। फिर, सोमवार को प्रात:कालीन अर्घ्य के साथ व्रत की समाप्ति हो जाएगी।
बिहार के छात्रों व कलाकारों द्वारा बनाई गई छठ पूजा पेंटिंग को लेकर एमिटी विश्वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर विवेकानंद पांडेय कहते हैं कि वे इसे वर्ल्ड बुक आफ रिकार्ड में जगह दिलाने की काेशिश करेंगे
ताकि पूरी दुनिया इसे देख सके। वे कहते हैं कि छठ व्रत में डूबते व उगते सूर्य को अर्घ्य देना बताता है कि दोनों का महत्व है। इस पर्व में शुद्धता का भी खास ध्यान रखा जाता है।
एमिटी विश्वविद्यालय की छात्रा अंकिता बताती है कि पेटिंग में छठ व्रत की शुरुआत करने वाली दो प्रमुख चरित्रों ‘द्रौपदी’ एवं ‘सीता’ को दिखाया गया है। काटन फैब्रिक पर बनाई गई पेंटिंग के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि छठ व्रत पुरानी पीढ़ी के साथ-साथ नई पीढ़ी के लिए भी है।
एमिटी विश्वविद्यालय की एक अन्य छात्रा शालिनी कहती हैं कि पेंटिंग बनाने में नील, हल्दी, चंदन पाउडर आदि के प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया गया है।




