छठ पूजा में इस सब्जी का है विशेष महत्व, धार्मिक दृष्टिकोण से भी है सात्विक, जानें फायदे

लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय के साथ शुरू हो गई है. चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व का आज पहला दिन है. इसमें छठ व्रती सुबह में गंगा नदी या तालाब में स्नान करते हैं. उसके बाद भगवान भास्कर की पूजा कर पर्व की विधिवत शुरुआत करते हैं. आज के दिन छठ व्रती कद्दू भात बनाकर खाती है और उसे बाद 36 घंटों की निर्जला व्रत को प्रारंभ करते हैं. नहाय खाए के साथ व्रती नियमों के साथ सात्विक जीवन जीते हैं और हर तरह की नकारात्‍मक भावनाएं जैसे लोभ, मोह, क्रोध आदि से खुद को दूर रखते हैं.

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छठ पर्व में कद्दू का है विशेष महत्व
नहाय खाय के दिन कद्दू भात का विशेष महत्व है. इस दिन खासतौर पर कद्दू की सब्जी बनायी जाती है. व्रत रखने वाले सबसे पहले इसे ग्रहण करते हैं. फिर घर के सदस्यों सहित अन्य लोगों के बीच प्रसाद के रूप में इसे बांटा जाता है और ग्रहण किया जाता है. छठ व्रती नहाय खाए कि दिन कद्दु का सेवन करते हैं. ऐसे में बाजारों में इसे लेकर कद्दू की डिमांड बढ़ जाती है. हम बात करें गया कि तो गया में भी कद्दू की डिमांड जोरों पर रही. बाजारों में 40 रुपए किलो कद्दू आसानी से उपलब्ध हो रहा है.

कद्दू के सेवन से सकारात्मक ऊर्जा का होता है संचार
डाॅ. अजीत कुमार ने बताया कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कद्दू आसानी से पचने वाली सब्जी है. धार्मिक मान्‍यताओं के अलावा इसे खाने के कई सारे फायदे हैं. कद्दू में एंटी-ऑक्सीडेंट्स पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है, जिससे इम्यून सिस्टम स्ट्रांग होता है और व्रती बीमारियों से बचे रहते हैं. इसके अलावा, कद्दू में डाइटरी फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है.

उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद संपन्न होगा महापर्व
बता दें कि इस बार की छठ पूजा शुक्रवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो रही है और सोमवार को खत्म होगी. 28 अक्टूबर को नहाय खाय, 29 अक्टूबर को खडना, 30 अक्टूबर को शायं अर्घ्य तथा 31 अक्टूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद महापर्व की समाप्ति हो जाती है.

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