मुजफ्फरपुर: बिहार में विवाह का दौर शुरू हो चुका है. तय लग्न के मुताबिक लोग शादी की तैयारी में जुट गए हैं. शादी में मौरी की डिमांड चरम पर रहता है. मुजफ्फरपुर में भी इसकी डिमांड बढ़ गई है.हिंदू धर्म में विवाह के दौरान सात फेरे लेते वक्त मौरी को दूल्हे के सिर के ऊपर रखा जाता है. मौरी को सिर पर रखकर ही दूल्हा अपनी दुल्हन के साथ में सात फेरे लेता है. इसलिए इस मौरी का शादी में खास महत्व है.
मुजफ्फरपुर के गरीब स्थान रोड का छाता बाजार शादी- ब्याह में काम आने वाली सामग्रियों की बिक्री के लिए मशहूर है. छाता बाजार में माला और मौरी की ढेरों दुकाने है. इसी छाता बाजार में अब्दुल्ला का भी दुकान है, अब्दुल्ला पिछले 10 साल से मौरी बनाने का काम कर रहे है. इनके द्वारा तैयार की गई मौरी की डिमांड मुजफ्फरपुर सहित बिहार के अन्य जिलों में भी है.
शादी के लिए बेहद अहम है मौरी
मौरी शादी ब्याह में प्रयोग होने वाला बेहद ही अहम सामग्री है. मुजफ्फरपुर में तकरीबन 15- 20 लोग ही इसे बनाने के काम से जुड़े हैं. जिनमें से एक उनका परिवार भी है. अब्दुल्ला ने अपने परिवार में ही इस मौरी बनाने के काम को सीखा है. अब्दुल्ला के अनुसार मौरी बनाने में इसकी सजावट सबसे महत्वपूर्ण भाग होती है. मौरी जितनी सुंदर होगी बाजार में उसकी उतनी ही कीमत मिलेगी.

500 रुपए तक में बिकता है बाजार में मौरी
अब्दुल्ला ने बताया कि आमतौर पर मौरी बाजार में 300 से 500 रुपए प्रति पीस बिकता है. उन्होंने आगे बताया की वह 150 से 200 रुपए में दुकानदारों को दे देते हैं. एक दिन में 6 से 8 मौरी हीं बना पाते हैं. इस बार लग्न में उनके द्वारा बनाई गई तकरीबन 300 मौरी बाजार में बिकेगी. इस अनुसार तकरीबन 300 दूल्हे अब्दुल्ला की बनाई मौरी पहन कर शादी करेंगे.
बांस की कर्ची से तैयार किया जाता है मौरी
अब्दुल्ला बताते हैं कि मौरी बनाने में सबसे अहम चीज उसके बीच में लगा बांस का कर्ची होता है. इसी बांस के कर्ची के सहारे मौरी टिका होता है. मौरी के चारों तरफ रंगीन कागज से सजावट की जाती है. मुजफ्फरपुर में बनने वाली मौरी आस-पास के जिला मोतिहारी, सीतामढ़ी, समस्तीपुर और वैशाली में भी सप्लाई होती है. लग्न के दौरान बिकने वाला यह मौरी विवाह में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
