मुजफ्फरपुर में मिले कुष्ठ के 125 नए मरीज, अब संख्या 250 के पार…

जिले में कुष्ठ रोग के 125 नए मरीज मिले हैं। आठ से 17 अक्टूबर तक चलाए गए विशेष कुष्ठ रोगी खोज अभियान के तहत कराई गई स्क्रीनिंग में इन नए मरीजों की पहचान की गई है। चिह्नित मरीजों की कड़ी निगरानी की जा रही है। रोगी जिस पीएचसी के तहत मिले हैं, उनका इलाज भी वहीं कराया जा रहा है। नए मरीज मिलने के साथ ही जिले में कुष्ठ रोगियों की संख्या 293 हो गई है। जिले में पहले से 168 मरीज हैं, जिनका इलाज चल रहा है।

Duplicate Medicines: लखनऊ में नकली दवा पकड़े जाने के मामले में मेडिसिन  मार्केट के कुछ व्यापारियों पर कसेगा शिकंजा - Why is Lucknow Medicine Market  silent on the business of ...छह माह तक की दवा

कुष्ठ रोग नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल व अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डा.सुभाष प्रसाद सिंह ने बताया कि रोगियों की खोज के लिए विशेष अभियान चलाया गया था। मरीजों को आशा के माध्यम से दवा दी गई। मरीज जिस श्रेणी का है उसे उसी हिसाब से छह माह तक की दवा दी जाती है। इस काम के लिए आशा को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। उन्होंने कहा कि जिले में कुष्ठ रोग की प्रसार दर स्वास्थ्य मानक के नीचे है। मानक यह है कि प्रति 10 हजार पर एक रोगी होना चाहिए। कुष्ठ रोगी को दवा के साथ दिव्यांगता प्रमाणपत्र दिया जाता है।

इस तरह चला खोज अभियान, मिले मरीज

जिला कुष्ठ रोग नियंत्रण अभियान के जिला पर्यवेक्षक अरुण कुमार ने बताया कि गांधी जयंती के बाद 10 दिनों तक अभियान चलाया गया। एक हजार की आबादी पर एक टीम लगाई गई। इसके लिए कुल 4,132 टीमें लगाई गईं। टीम में एक आशा व एक स्वयंसेवी को रखा गया। इसके पहले प्रशिक्षण भी दिया गया। सर्च अभियान के तहत जिले में 45,94,528 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इसमें 2,500 संदिग्ध कुष्ठ रोगी मिले। संदिग्धों की जांच के बाद 125 रोगी की पहचान की गई। अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह कार्यक्रम पदाधिकारी कुष्ठ नियंत्रण डा.सुभाष प्रसाद सिंह कहते हैं कि कुष्ठ रोग सामान्य बीमारी है। यह छुआछूत से नहीं फैलती। इसका इलाज संभव है। लक्षण दिखने पर इलाज करवाएं। सदर अस्पताल से लेकर पीएचसी स्तर तक जांच, इलाज व दवा मुफ्त है। जनरल ओपीडी में इसके इलाज की सुविधा है।

ऐसे करें पहचान, ये बरतें सावधानी

सदर अस्पताल के मेडिसिन विशेषज्ञ डा.नवीन कुमार ने बताया कि शरीर का कोई भी दाग-धब्बा सुन्न हो, उसमें खुजली न हो, पसीना न आता हो, कान पर गांठ हो, हथेली व तलवे सुन्न हों। यह सब कुष्ठ रोग के लक्षण हो सकते हैं। इसमें जल्द से जल्द इलाज किया जाना चाहिए। लक्षण पर निगरानी और गंभीरता बरतें। चोट से बचें। अगर घाव हो गया हो तो उसे साफ रखें। बच्चों में कुष्ठ रोग की संभावना व्यस्कों से अधिक होती है। इसलिए बच्चों को हमेशा संक्रमित व्यक्ति से दूर रखें।

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