पटना के एक डाक्टर डा. फजल इमाम पर पर सिविस सर्जन कार्यालय ने 50 हजार रुपए जुर्माना लगाया है। डाक्टर पर आरोप है कि इन्होंने मरीज की बजाय उसके बड़े भाई को इंजेक्शन लगा दिया, जिसके कारण थोड़ी ही देर बाद उसकी मौत हो गई। हालांकि डाक्टर के खिलाफ कार्रवाई इस मामले में नहीं हुई है।
सात अगस्त को सामने आया था मामला
बुद्धा कालोनी थानान्तर्गत बांस घाट में जर्राही क्लीनिक चलाने वाले डा. फजल इमाम अली पर सिविल सर्जन कार्यालय ने 50 हजार रुपए का जुर्माना ठोंका है। डाक्टर ने गत 7 अगस्त को खांसी व फोड़े-फुंसी से पीड़ित छोटे बच्चे को दिया जाने वाला इंजेक्शन उसके बड़े भाई को लगा दिया था। इंजेक्शन देने के थोड़ी देर बाद ही बच्चे के मुंह से झाग निकलने लगा था और जबतक स्वजन पीएमसीएच ले जाते रास्ते में उसकी मौत हो गई थी।
पुलिस ने अब तक नहीं दर्ज किया केस
स्वजन ने बुद्धा कालोनी में प्राथमिकी के लिए आवेदन दिया था लेकिन पुलिस ने जांच के लिए उसे डीएम कार्यालय भेज दिया था। डीएम कार्यालय से सिविल सर्जन कार्यालय को जांच के लिए भेजा गया था। जांच में सिविल सर्जन डा. केके राय ने पाया कि डाक्टर ने क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत क्लीनिक चलाने के लिए पंजीयन नहीं कराया था। इसके बाद डा. फैजल इमाम पर 50 हजार रुपये जुर्माने का आदेश जारी किया।
डाक्टर की लापरवाही या जहरीला इंजेक्शन, दब गया मामला
गरीब आदमी के हंसते-खेलते स्वस्थ बच्चे की पल भर में मौत हो गई थी। इस मामले को तीन माह से अधिक हो चुके हैं, लेकिन पुलिस, जिला प्रशासन, सिविल सर्जन कार्यालय या औषधि विभाग समेत किसी ने कार्रवाई नहीं की। आजतक नहीं पता चला कि बांस घाट के पास झुग्गी में रहने वाली दुलारी देवी और किशोर सहनी के आठ वर्षीय पुत्र रोहित की मौत कैसे हुई। उसकी मौत डाक्टर की लापरवाही द्वारा बेवजह इंजेक्शन देने से हुई या इंजेक्शन ही जहरीला था, किसी को नहीं पता।
डीएम कार्यालय से भी नहीं हुई कोई पहल
ऐसे में जिम्मेदार लोगों को सजा देने की बात बेमानी है। शुरुआत में तो बुद्धा कालोनी थानाध्यक्ष ने मामला संज्ञान में होने और लिखित शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई की बात कही। इसके बाद डीएम कार्यालय द्वारा गठित जांच टीम की रिपोर्ट मिलने के बाद प्राथमिकी व कार्रवाई की बात कही गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है।




