मुजफ्फरपुर : शहर में अतिक्रमण की समस्या और उसके कारण लगने वाले ट्रैफिक जाम के विषय पर बिहार सिविल सोसायटी के अध्यक्ष आचार्य चंद्र किशोर पाराशर की ओर से पटना उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका की गुरुवार को अंतिम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायामूर्ति संजय करोल एवं न्यायमूर्ति पार्थ सारथी के न्यायपीठ ने इस याचिका के संबंध में अपना निर्णय दिया।
बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग के एडीशनल चीफ सेक्रेटी, तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त, मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी एवं वरीय आरक्षी अधीक्षक तथा मुजफ्फरपुर नगर निगम के नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप और शिकायत का निष्पादन चार महीने के अंदर करते हुए इसकी जानकारी न्यायपीठ को प्रस्तुत करें।
याचिकाकर्ता आचार्य पाराशर ने उक्त जनहित याचिका में आरोप लगाया है कि मुजफ्फरपुर के मुख्य बाजार एवं सड़कों पर विधि के खिलाफ ढंग स्थायी दुकानें तथा अस्थायी दुकान के रूप में गुमटी, ठेला आदि को बड़ी संख्या में रहने के कारण यातायात अवरुद्ध होता है।
नगर थाना, सिकंदरपुर ओपी, एसएसपी आवास एवं डीएम आवास, सरकारी व गैर सरकारी भवन सड़कों को अतिक्रमण कर बनाये गये है।




