पटना : बिहार के छपरा में जहरीली शराब की वजह से मरने वालों की संख्या 100 के पार पहुंच गई है। नीतीश कुमार की सरकार मृ’तकों की संख्या छि’पा रही है। रविवार को भारतीय जनता पार्टी के सांसद सुशील मोदी ने यह आ’रोप लगाया।

उन्होंने कहा कि कल (शनिवार को) मैं छपरा में जहरीली शराब त्रासदी में जान गंवाने वालों के परिवारों से मिला। म’रने वालों की संख्या 100 को पार कर गई है लेकिन सरकार संख्या छिपा रही है। पुलिस के ड’र से लोग बिना पोस्टमॉर्टम किए अपने परिवार के सदस्यों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बिहार जहरीली शराब त्रासदी की जांच के लिए अपनी जांच टीम भेजने का फैसला किया है। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि बिहार के दो जिलों में कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से आठ और लोगों की मौ’त हो गई है। सारण से सटे सीवान जिले में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि बेगूसराय में दो अन्य लोगों की मौ’त हो गई।
अपुष्ट खबरों में दावा किया गया है कि सारण जिले में अवैध रूप से बनी देशी शराब पीने से अब तक 60 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, अधिकारियों ने मरने वालों की संख्या 30 बताई है।
बिहार जहरीली शराब त्रासदी में और अधिक मौतों के बारे में अन्य जिलों में फैल रही मीडिया रिपोर्टों के मद्देनजर, एनएचआरसी ने कहा कि उसने ऑन-स्पॉट जांच के लिए अपने एक सदस्य की अध्यक्षता में जांच टीम को भेजने का फैसला किया है।
आयोग ने एक बयान में कहा कि कमीशन जानना चाहता है कि पीड़ितों को कहां और किस तरह का इलाज मुहैया कराया जा रहा है। उनमें से ज्यादातर गरीब परिवारों से हैं और शायद निजी अस्पतालों में महंगा इलाज नहीं करा सकते। इसलिए राज्य सरकार की ओर से यह अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि जहां कहीं भी उपलब्ध हो, उन्हें सर्वोत्तम संभव चिकित्सा उपचार प्रदान किया जाए।




