मुजफ्फरपुर : सदर अस्पताल में कुव्यवस्था हावी है। यहां प्रसव के लिए आने व उसके बाद जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल रही है। इससे जच्चा व बच्चा की जान को खतरा बना रहता है। शुक्रवार को अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का एक और नमूना सामने आया, जब एक प्रसूता एंबुलेंस के लिए गिड़गिड़ाती रही, लेकिन किसी ने उसकी सुध नहीं ली।
दरअसल, शुक्रवार को लदौरा की आरती कुमारी को मातृ-शिशु अस्पताल से प्रसव के बाद डिस्चार्ज किया गया। अस्पताल प्रबंधन से एंबुलेंस के लिए आग्रह की, नहीं उपलब्ध होने पर ई रिक्शा से घर के लिए चली। माड़ीपुर ओवरब्रीज पर अचानक बच्चे की हालत गंभीर हो गई। स्वजन वहां से उसको वापस लेकर सदर अस्पताल आए। पहले तो निजी अस्पताल जाने की सलाह दी जाने लगी। आशा प्रमिला देवी की जिद के बाद एसएनसीयू में भर्ती किया गया। बच्चे की हालत बिगड़ने के बाद आरती की हालत भी खराब होने लगी।
मजबूरी में ई रिक्शा का सहारा
आरती के स्वजन ने बताया कि नौ तारीख को उसको ई-रिक्शा से लेकर आए थे। मातृ-शिशु सदन में बच्चे का जन्म हुआ। उसके बाद दस फरवरी को को डिस्चार्ज किया गया। एंबुलेंस की मांग करने पर उपलब्ध नहीं कराया गया। उसके बाद मजबूरी में ई रिक्शा पर जाना पड़ा। एंबुलेंस उपलब्ध करा दिया जाता तो यह हालत नहीं होती। वहीं, मामले की शिकायत मिलने पर सिविल सर्जन एसएनसीयू पहुंचे। उसके बाद प्रबंधक प्रवीण कुमार को चिकित्सक से दिखाने तथा अतिरिक्त केयर करने का आदेश दिया।
सिविल सर्जन ने मांगा जवाब
सिविल सर्जन डा.यूसी शर्मा ने कहा कि प्रसव के लिए जो महिला यहां पर आ रही उसको घर से ले आने व प्रसव के बाद पहुंचाने के लिए मुफ्त एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध है। यह सुविधा क्यों नहीं मिल रही, आश्चर्य का विषय है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक से दो माह के अंदर कितने प्रसव वाली महिला आटो, ई रिक्शा या अन्य निजी वाहन से आईं। प्रसव के बाद कितने को एंबुलेंस मिली, इस पर रिपोर्ट मांगी है। उसके बाद दोषी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, जिला कार्यक्रम प्रबंधक रेहान अशरफ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने अब सभी मरीजों के लिए एंबुलेंस सेवा फ्री कर दी है, लेकिन शर्त यह है कि लाभ तभी मिल पाएगा जब मरीज किसी सरकारी अस्पताल में भर्ती होने जाएंगे। सरकार ने अब किसी भी मरीज को सरकारी अस्पताल में भर्ती होने या इमरजेंसी में सरकारी अस्पताल जाने के लिए फ्री एम्बुलेंस सेवा देने का फैसला लिया है।
पहले भी विभाग की ओर से एम्बुलेंस सेवा का लाभ मरीजों को दिया जा रहा था, लेकिन इसमें कुछ शर्तें थीं। गर्भवती व प्रसव के बाद उन्हें घर पहुंचाने के लिए ही दिया जाता था। बीमार बच्चों, बुजुर्गों, राशन कार्डधारी मरीज, कालाजार रोगी, रेफर बच्चे व चमकी-बुखार से पीड़ित बच्चों को ही यह सेवा मुफ्त मिलती थी।

