बिहार के 41वें राज्यपाल के रूप में राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने शपथ ले ली है। उन्हें हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने शुक्रवार को दोपहर बाद करीब साढ़े 12 बजे शपथ दिलाई। 69 साल के राजेंद्र आर्लेकर की नियुक्ति को आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
इससे पहले आर्लेकर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल थे 6 जुलाई 2021 को उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। इससे पहले, गुरुवार को बिहार के राज्यपाल पद से मुक्त होकर फागू चौहान पटना से रवाना हो गए। गुरुवार को उनकी विदाई के समय और शुक्रवार को नए राज्यपाल आर्लेकर की अगवानी में भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के साथ एयरपोर्ट पर मौजूद रहे। शपथ ग्रहण समारोह बिहार के राजभवन में संपन्न हुआ।
RSS बैकग्राउंड के आर्लेकर गोवा निवासी हैं
राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर गोवा के रहने वाले हैं। 23 अप्रैल 1954 को गोवा के पणजी में हुआ था। बाल्यकाल से ही वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे। 35 साल की उम्र में उन्होंने भाजपा में शामिल हुए। भाजपा कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले अर्लेकर पहले विधायक बने और फिर मंत्री पद पर भी रहे हैं। 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद गोवा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की मुख्यमंत्री बनने की चर्चा थी, लेकिन भाजपा ने लक्ष्मीकांत पारसेकर को गोवा की कमान सौंप दी। राजेंद्र आर्लेकर को गोवा विधानसभा को कागज रहित बनाने का श्रेय दिया जाता है।

मंत्री, विस अध्यक्ष जैसी भूमिकाएं भी निभा चुके
राजेंद्र अर्लेकर विधानसभा में सदस्य से लेकर मंत्री पद पर काम करने का अनुभव प्राप्त है। वे 2002 से 2007 तक विधायक थे। 2012 से 2015 तक गोवा विधानसभा के अध्यक्ष रहे। वहीं 2015 से 2017 तक गोवा के वन पर्यावरण और पंचायती राज्य मंत्री रहे थे। इसके बाद उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया था। वे अनुसूचित जाति और जनजाति के विकास और कल्याण कार्यक्रम से भी जुड़े रहे।



