सीतामढ़ी में मौ’त का पुल: स्कॉर्पियो और बाइक तक को ‘निगल’ गया है, पर शासन-प्रशासन की नींद ना खुली

सीतामढ़ी: बिहार के सीतामढ़ी जिले में चचरी पुल आवागमन का मुख्य रास्ता बना हुआ है। कहने के लिए तो यह पुल आवागमन का साधन है, लेकिन इसे ‘मौत’ का पुल कहे, तो कोई बड़ी बात नहीं है। इस चचरी पुल से गिरकर लोग मौत के शिकार हो भी चुके हैं। चचरी से फिसल कर गिरने से जख्मी होने वालों की संख्या तो कई हैं। खतरनाक बने चचरी पुल देखकर भी जनप्रतिनिधि और प्रशासन खामोश है। यानी उनके स्तर से अबतक ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है, ताकि यह जानलेवा चचरी पुल आवागमन का सुलभ साधन साबित हो सके।

फिलहाल इस पुल पर लगे बांस की चचरी की हालात ऐसी है कि कब, कौन हादसे का शिकार बन जायेगा, कहा नहीं जा सकता है। मौत की तरह बने इस चचरी पुल की मरम्मत को लेकर जनप्रतिनिधि और प्रशासन कोई भी गंभीर नहीं है। हां! यह सच है कि जब पुल से गिर कर किसी की मौत होगी, तब उस पर राजनीति करने के लिए मौके पर सफेदपोश जरूर पहुंच जायेंगे और प्रशासन खुद का गर्दन बचाने के लिए चचरी पुल की मरम्मत कराने में जुट जायेगा। तबतक ये दोनों हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहेंगे। वैसे यह कोई नई बात नहीं है।स्थानीय लोगों ने बताया कि 2018 में प्रल्यांकरी भीषण बाढ़ आई थी। इसी बाढ़ में बाजपट्टी- रसलपुर मुख्य पथ पर बना पुल बह गया था। यह पुल बाजपट्टी बाजार से सटा है। पुल के बह जाने के तीन साल हो गये है, लेकिन निर्माण की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा सका है। पूर्व जिला पार्षद चंद्रजीत प्रसाद यादव व पूर्व विधायक रंजू गीता ने पुल के निर्माण को लेकर डीएम से मिलकर बात की थी। बाद में पत्राचार भी किया था। फिर भी कुछ नही हुआ। स्थिति ज्यों कि त्यों बनी हुई है। स्थानीय लोग हर वर्ष आपसी सहयोग से चचरी पुल बनाते रहे है।मौत एवं जख्मी होने की कई घटनाएं

उक्त चचरी पुल से एक स्कॉर्पियो नीचे गिर गया था। इस घटना में अमाना निवासी मकेश्वर राय के 26 वर्षीय पुत्र पप्पू कुमार की मौत हो गई थी। इससे पूर्व भी स्थानीय निवासी राजेश्वर राय भी पुल से नीचे चले गए थे। उनका पैर फ्रैक्चर हो गया था। वहीं, बाबू नरहा के मुन्ना कुमार भी जाने के क्रम में पुल से नीचे गिर चुके थे। इस तरह की कई घटनाएं हो चुकी हैं। खास बात यह कि इस पुल के उस पर बाचोपट्टी नरहा, हाईस्कूल में सैकड़ों बच्चे प्रतिदिन आते-जाते हैं। वहीं उसके बगल में ही एक मध्य विद्यालय भी है। दोनों स्कूल के बच्चे पैदल और साइकिल से चचरी से आते-जाते हैं, जिससे बराबर खतरा बना रहता है। इधर, चचरी पुल के कारण बड़े वाहनों को काफी दूरी तय कर प्रखंड मुख्यालय आना-जाना पड़ता है।

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