बिहार : लोकसभा चुनाव में अब कुछ ही महीनों का वक्त बचा है। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की जोड़ी ने 6 दलों को साथ रखकर बीजेपी को चुनौती देने की तैयारी कर ली है। दूसरी तरफ, बीजेपी भी उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान, जीतनराम मांझी, पशुपति पारस जैसे नेताओं को अपने खेमे में लाकर मजबूती से ताल ठोकने वाली है। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के अनुसार वैसे तो 2024 में एनडीए और महागठबंधन के बीच ही मुख्य मुकाबला होने के आसार हैं। मगर कुछ दिग्गज ऐसे हैं जिन्होंने इन दोनों ही गठबंधनों की चिंता बढ़ा दी है। ये दिग्गज नेता इन दोनों ही गठबंधन में शामिल न होकर चुनावी मैदान में उतरने की प्लानिंग कर रहे हैं।
बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं। बीजेपी इन सभी सीटों पर एनडीए की जीत की रणनीति से मैदान में उतरने वाली है। प्रदेश से लेकर मंडल और बूथ लेवल तक पार्टी ने माहौल बनाने में जुटी है। बीजेपी अगले चुनाव में लोजपा रामविलास, रालोजपा, रालोजद और हम के साथ गठबंधन में उतरेगी। वहीं, दूसरी ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू, लालू यादव की आरजेडी, कांग्रेस और वाम दल एक साथ बीजेपी नीत एनडीए के खिलाफ चुनाव में ताल ठोकेंगे। ऐसे में अगला चुनाव बिहार में दिलचस्प होने वाला है। NDA और महागठबंधन के अलावा भी राज्य में कुछ दल और नेता हैं, जिन्होंने इन दोनों गठबंधनों का समीकरण बिगाड़ने की प्लानिंग कर ली है। इनमें असदुद्दीन ओवैसी, मुकेश सहनी और प्रशांत किशोर का नाम प्रमुख है।

ओवैसी की पार्टी बिहार में बनाएगी तीसरा मोर्चा
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM लोकसभा चुनाव 2024 से पहले बिहार में तीसरा मोर्चा बनाकर मैदान में उतरेगी। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान पिछले महीने यह घोषणा कर चुके हैं। उनका कहना है कि एआईएमआईएम आने वाले चुनाव में राज्य के अंदर समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन करेगी और एनडीए एवं महागठबंधन के खिलाफ लड़ेगी। एआईएमआईएम का सीमांचल और मुस्लिम बाहुल्य कुछ सीटों पर प्रभाव है। बीते विधानसभा चुनाव में पार्टी ने पांच सीटों पर जीत भी दर्ज की थी। हालांकि, आगामी चुनाव में इसका तीसरा मोर्चा कितना कारगर होगा यह तो वक्त ही बताएगा।
किस ओर करवट लेंगे वीआईपी प्रमुख?
विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के मुखिया मुकेश सहनी ने लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर अपने पत्ते अभी नहीं खोले हैं। सहनी अभी बिहार समेत झारखंड और यूपी में यात्रा निकाल रहे हैं। यात्रा खत्म होने के बाद इस साल नवंबर में वे ऐलान करेंगे कि किस गठबंधन में रहकर अगला चुनाव लड़ा जाएगा। मुकेश सहनी निषाद आरक्षण की पुरजोर मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जो भी गठबंधन निषादों को आरक्षण दिलाने का वादा करेगा, वे उसके साथ ही चुनाव लड़ेंगे। पहले उनके बीजेपी के साथ जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं। मगर आने वाले समय में उनका ऊंट किस करवट बैठता है कुछ कह नहीं सकते हैं। फिलहाल उनके लिए एनडीए, महागठबंधन, तीसरा मोर्चा इन सभी का विकल्प खुला है।