बिहार : लगता है कि लोकसभा और विधानसभा, दोनों ही चुनावों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मिथिलांचल को पूरी तरह राजनीतिक रूप से कब्जा करने के लिए प्रयासरत हैं। एम्स का मुद्दा उठाने से लेकर दरभंगा की मेयर को अपनी पार्टी में लाने तक। मंत्री संजय झा को ताकत देने के लिए योजनाएं लाने से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को घेरने तक- हर जगह नीतीश ने यह दिखा दिया है। अब जातीय जनगणना में ब्राह्मणों की कम आबादी के बावजूद विधान परिषद् की सीट पर ब्राह्मण को लाना भी उसी कूटनीति का एक हिस्सा है। ऐसे ब्राह्मण व्यक्ति को लाया गया है, जिनके पिता ने कांग्रेस की दमदार राजनीति की और मिथिलांचल के बूते बिहार के मुख्यमंत्री रहे। जिनके भाई मिथिलांचल के बूते लंबे समय तक भाजपा के सांसद रहे। कई राजनीतिक पहचान के साथ इस व्यक्ति की शैक्षणिक पहचान है। और अब, नई पहचान यह कि उपेंद्र कुशवाहा के जदयू छोड़ने के साथ विधान परिषद् से त्यागपत्र देने के बाद खाली सीट पर जदयू ने राजवर्धन आजाद को एमएलसी बनाया है।
विधान पार्षद बनाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अनुशंसा की थी
राजभवन की ओर से डॉ. राजवर्धन आजाद को विधान परिषद् बनाने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। यह सीट जदयू छोड़ कर नई पार्टी राष्ट्रीय लोक जनता दल बनाने वाले उपेंद्र कुशवाहा के कारण खाली हो गई थी। डॉ. राजवर्धन आजाद को विधान पार्षद बनाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अनुशंसा की थी। इसके बाद राजभवन की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई। दरअसल, राज्यपाल कोटे से 12 सदस्यों के मनोनयन का प्रावधान है।

सीएम नीतीश कुमार के करीबी हैं डॉ. राजवर्धन आजाद
डॉक्टर राजवर्धन आजाद देश के जाने माने नेत्र चिकित्सक हैं। उन्हें बीसी रॉय अवार्ड भी मिला था। नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में उनका अहम योगदान माना जा रहा है। दो साल पहले सीएम नीतीश कुमार की आंखों की सर्जरी दिल्ली एम्स में डॉ. राजवर्धन आजाद की निगरानी में ही हुई थी। बिहार सरकार ने 2019 में राजवर्धन आजाद को कई पदों पर मनोनीन किया था। वह बिहार विश्वविद्यालय आयोग के भी अध्यक्ष रह चुके हैं। डॉ. आजाद सीएम नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं।