जानें इस मंदिर की रहस्यमय कहानी,जहां आज भी है माता दुर्गा का गहबर….

जमुई: शारदीय नवरात्र प्रारंभ होने में बस कुछ समय और बाकी हैं, उसके बाद मां दुर्गा के भक्त लगातार 9 दिनों तक माता दुर्गा के 9 स्वरूप की पूजा-अर्चना करेंगे. जमुई में मां दुर्गा का ऐसा ही प्राचीन मंदिर है, जहां 9 दिनों तक माता के भक्तों की भारी भीड़ लगेगी. यह मंदिर 300 साल पुराना है और इसका इतिहास चंदेल राजवंश से जुड़ा है. वर्तमान में इस मंदिर का गर्भ गृह राजा के महल के बीचो-बीच अवस्थित है. इसके अलावा भी इस मंदिर की कई ऐसी खासियत है जो इस प्राचीन के साथ प्रसिद्ध भी बनाती है.

जमुई जिला के खैरा में अवस्थित मां दुर्गा का यह प्राचीन मंदिर चंदेल राजवंश का जीता जागता उदाहरण है. चंदेल राजवंश के 13वें राजा गुरु प्रसाद सिंह के द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराया गया था. हालांकि, राजा के महल के बीचो-बीच बना यह मंदिर पहले रानी की पूजा का मुख्य कक्ष हुआ करता था. जहां प्राचीन पूजा पद्धति से राजा रानी प्रतिदिन माता की पूजा आराधना किया करते थे. इसी मंदिर में माता की एक भव्य पिंडी भी बनी है, जिसे आज तक बिल्कुल उसी अवस्था में रखा गया है. बाद में ग्रामीणों के द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्धार कर दिया गया और अब यह नवरात्रि में लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र बनता रहा है.

लोगों को अंदर पूजा करने की थी मनाही
स्थानीय लोग बताते हैं कि राजा के महल के बीचो-बीच बना माता दुर्गा का गर्भ गृह भले हीं अभी भक्तों की आस्था का केंद्र है, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब राजा का शासन काल प्रभावी अवस्था में था. उस वक्त इस गर्भगृह के अंदर लोगों के प्रवेश कर पूजा करने की मनाई थी. आम लोगों के लिए महल के ठीक सामने माता दुर्गा का एक मंदिर बनाया गया था. लेकिन गर्भ गृह में केवल राजा और रानी ही पूजा करते थे. लेकिन करीब 180 साल पूर्व जब राजा अपना राजपाट छोड़कर चले गए उसके बाद यहां आम लोगों का आना-जाना शुरू हो गया और तब से ही स्थानीय लोगों के द्वारा श्रद्धा भाव से माता दुर्गा की पूजा अर्चना की जाती है.

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