मुजफ्फरपुर: विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों के महत्व, पोषण सुरक्षा तथा डेयरी क्षेत्र की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 1 जून को विश्व दुग्ध दिवस मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2001 में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा की गई थी।


इसका उद्देश्य लोगों को दूध के स्वास्थ्य लाभ, पोषण संबंधी महत्व तथा डेयरी उद्योग के योगदान के प्रति जागरूक करना है। वक्ताओं ने कहा कि दूध केवल एक पेय पदार्थ नहीं, बल्कि संपूर्ण पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत है, जो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए लाभदायक है। इसके साथ ही दही, पनीर, घी, मक्खन एवं अन्य दुग्ध उत्पाद भी बेहतर स्वास्थ्य और शारीरिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


कार्यक्रम के दौरान विश्व दुग्ध दिवस के इतिहास, उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि यह दिवस लोगों को संतुलित आहार, पोषण और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस वर्ष विश्व दुग्ध दिवस की थीम “Celebrating Women Farmers” रखी गई है, जिसके माध्यम से दुग्ध उत्पादन, कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं के अमूल्य योगदान को सम्मानित किया जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने डेयरी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


कार्यक्रम की अध्यक्षता सुशीला देवी ने की। इस अवसर पर नन्दकिशोर राय, श्याम नंदन राय, मुकेश राम, देवनंदन साह, डॉ. सीताराम राय, अर्चना कुमारी, उषा देवी, मीणा देवी एवं संगीता कुमारी सहित निदेशक मंडल के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डेयरी क्षेत्र के विकास, किसानों की आय वृद्धि, पोषण सुरक्षा और महिलाओं के सशक्तिकरण जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।


इस अवसर पर असलम परवेज, डॉ. एस. बी. हजारिका, मनोज कुमार चौधरी, दीपक कुमार, सुनील कुमार, संजय कुमार सिंह, विवेक कुमार झा, सुनील कुमार, विकु कुमार एवं सुदामा कुमार पंडित सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों एवं उपस्थित लोगों ने विश्व दुग्ध दिवस के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने तथा दूध एवं दुग्ध उत्पादों के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर डेयरी क्षेत्र से जुड़े किसानों, महिलाओं एवं दुग्ध उत्पादकों के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें समाज और राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण भागीदार बताया गया।
