14 शिक्षकों ने नौकरी से किया किनारा, शिक्षक के सभी 84 में से 35 सीट खाली

बिहार : बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा का असर कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय पर देखने को मिला है। अभी नई बहाली से शिक्षकों की भर्ती शुरू ही हुई थी कि 14 शिक्षकों ने नौकरी छोड़ दी। जिसकी वजह से जिले के 25 कस्तूरबा विद्यालय में 84 शिक्षक के पदों में 35 शिक्षकों के पद खाली हो गए। अभी 49 शिक्षक कार्यरत हैं। वर्तमान में अभी 25 कस्तूरबा विद्यालय मिलकर 2800 से बच्चे हैं। यानी 33 बच्चों पर एक शिक्षक कस्तूरबा में दिए जाते हैं। वहीं, शिक्षक को कमी होने से कस्तूरबा विद्यालय की पढ़ाई प्रभावित हुई है। खासकर जो 10वीं और 12वीं के बच्चे हैं उनकी पढ़ाई पर असर पड़ा है। जिले में टाइप एक में वर्ग 6 से 8 तक टाइप चार में नौवीं से 12वीं कक्षा में तीन शिक्षक रखने का जबकि टाइप तीन में 6 से 12वीं में छह शिक्षक रखने का परमिशन है।

वहीं, मिली जानकारी के मुताबिक शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षक की कमी को देखते हुए 20 तारीख से शिक्षकों की काउंसलिंग शुरू की जाएगी। यह काउंसलिंग पूर्व में जारी मेधा सूची के आधार पर होगी, ताकि दिसंबर के अंतिम तक सभी कस्तूरबा विद्यालय जहां शिक्षकों की कमी है वहां पर शिक्षक उपलब्ध करा दिए जाएं और वहां पढ़ने वाले बच्चियों को किसी तरह की परेशानी ना हो।

कस्तूरबा के प्राचार्य 15 तक अपने स्कूल में रिक्त सीटों की सूची को करवाएं उपलब्ध

डीपीओ एसएसए जमाल मुस्तफा ने बताया कि सत्र 2023 में 2800 बच्चों में 2657 सीटों पर नामांकन लिया गया है। जबकि 143 सीटें खाली रह गई हैं। 15 दिसंबर तक सभी स्कूलों को रिक्त सीटों की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। साथ ही साथ नामांकन को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलने का निर्देश दिया गया है। जो 25 दिसंबर तक चलाया जाएगा। इसमें चिह्नित बच्चों की सूची उपलब्ध कराई जाएगी इसके बाद 1 अप्रैल से नए सत्र के लिए ऑफलाइन नामांकन शुरू होगा। बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा के कारण कस्तूरबा विद्यालय में शिक्षकों की कमी हुई है। जिसे भरने की प्रक्रिया 20 तारीख से शुरू की जा रही है। ताकि यहां पढ़ने वाले बच्चियों को किसी तरह की परेशानी ना हो। – डॉ. जमाल मुस्तफा, डीपीओ एसएसए

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Discover more from Muzaffarpur News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading