जिस बात की आशंका जताई जा रही थी कि बिहार की सीटों के बंटवारे को लेकर एनडीए में खटपट चल रही है। वो अब खुलकर सामने आ गई है। सीट बंटवारे के बाद बीजेपी के पुराने सहयोगी पशुपति पारस जल्द बड़ा ऐलान कर सकते है। बताया जा रहा है कि वो केंद्रीय पद से इस्तीफा दे सकते हैं। जिसका ऐलान बहुत जल्दी करेंगे। जिसकी वजह है। सीट बंटवारे में उनकी पार्टी को एक भी सीट न मिलना।

दरअसल 18 मार्च को बिहार को लेकर एनडीए में सीटों का बंटवार हो गया। जिसमें बीजेपी 17, जेडीयू 16, चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) को 5, मांझी की हम, और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो को एक-एक सीट मिली है। जिसमें पारस की पार्टी आरएलजेपी का खाता ही नहीं खुला है। RLJP को एक भी सीट नहीं मिली। जिसको लेकर पशुपति पारस से लेकर उनकी पार्टी के नेताओं में भी नाराजगी है। और इसी के चलते अब वो एनडीए से नाता तोड़ सकते हैं। और केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा भी दे सकते हैं।
हालांकि सीटों के बंटवारे का खाका तो कई दिन पहले ही तैयार कर लिया गया था। लेकिन इसके बावजूद पारस को उम्मीद थी कि उनकी सुनवाई होगी। इस मामले में खुद पशुपति पारस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से सीट बंटवारे के निर्णय की समीक्षा करने की अपील भी की थी। लेकिन फैसला पारस के अनुरूप नहीं आया। जिसके चलते अब वो खुद बड़ा फैसला ले सकते हैं। नाराजगी की एक वजह ये भी है कि इस सीट बंटवारे में चिराग की लोजपा को 5 सीटें दे गई है। जिनमें से 4 सीटों पर पारस गुट का कब्जा था।

दरअसल 2019 लोकसभा चुनाव एलजेपी ने एनडीए के साथ लड़ा था। तब पार्टी में दो फाड़ नहीं हुई थी। लेकिन इसके बाद पार्टी दो गुटों में बंट गई थी। इस चुनाव में एलजेपी के 6 सांसद जीते थे। जिसमें पारस समेत 5 सांसदों ने अलग गुट बना लिया था। और पारस केंद्रीय मंत्री भी बन गए थे। लेकिन इस बार पासा उलटा पड़ गया। और भतीजा चाचा पर भारी पड़ गया। जो सीटें पारस की पार्टी के पास थीं। उन पर अब चिराग की पार्टी चुनाव लड़ेगी।
वहीं बताय जा रहा है कि महागठबंधन से भी पशुपति पारस की बातचीत चल रही है। कयास लगाए जा रहे है कि पारस महागठबंधन के साथ भी जा सकते हैं। लेकिन ये सिर्फ चर्चा है। इससे पहले आरएलजेपी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष और पूर्व सांसद सूरजभान सिंह ये दावा कर चुके हैं कि उनकी पार्टी का दावेदारी बिहार की चालीसों सीट पर है। ऐसे में देखना होगा कि पारस आने वाले वक्त में क्या फैसला लेते हैं। एनडीए में किरकिरी होने के बाद वो लालू के महागठबंधन में जाएंगे या फिर अकेले दम पर बिहार में चुनाव लड़ेंगे। चर्चा इस बात की भी है कि पशुपति पारस हाजीपुर से चिराग पासवान के खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं।



