केंद्रीय मंत्री और हाजीपुर से सांसद चिराग पासवान के दिवंगत पिता रामविलास पासवान के नाम की नेमप्लेट का गलत तरीके से इस्तेमाल करने का मामला सामने आया है। इस मामले में केंद्रीय मंत्री ने कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। दरअसल, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के पिता रामविलास पासवान ने हाजीपुर के लिए क्या-क्या नहीं किया।

हाजीपुर पहुंचते ही उनके नाम का शिलापट्ट कई जगहों पर दिख जाएगा। उनके काम की चर्चा इलाके के पुराने लोग करते नहीं थकते। हाजीपुर में सीपेट यानी सेंटल इंस्टिच्यूट ऑफ पैट्रोकेमिकल इंजीनियरंग एंड टेकनोलॉजी उन्हीं की ही देन है, लेकिन मौजूदा वक्त में सीपेट संस्थान ने रामविलास पासवान को भूलाया ही नहीं है, बल्कि उनकी घोर उपेक्षा भी कर रही है।

इसको लेकर केंद्रीय मंत्री ने दुख जताया है साथ ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग भी की है। चिराग पासवान ने अपने सोशल मीडिया पर ट्वि्ट कर इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने ट्विट कर लिखा कि,” मीडिया और पत्रकार साथियों के माध्यम से यह सूचना प्राप्त हुई कि हाजीपुर में मेरे नेता, मेरे पिता के नाम की नेमप्लेट का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया, जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है”।

उन्होंने कहा कि, “इस विषय के संज्ञान में आने के बाद मैंने तुरंत कार्रवाई के लिए स्थानीय जिला प्रशासन और सिपेट (CIPET) संस्थान के अधिकारियों से बात की। मैंने निर्देश दिया कि नेमप्लेट को पुनः सम्मानजनक स्थान पर लगाया जाए और ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो। मेरे नेता का अपमान किसी भी स्थिति में मुझे कतई बर्दाश्त नहीं है, और इस घटना में जो भी दोषी होगा, उस पर हर हाल में कार्रवाई की जाएगी”।
बता दें कि, बीते दिन हाजीपुर में जैसे ही पत्रकारों की एक टीम सीपेट संस्थान के अंदर गई, वहां एक बंद नाले का गटर दिखा और गटर उसी शिलापट्ट से ढंका था, जिसका उद्घाटनकर्ता के तौर पर रामविलास पासवान का नाम लिखा था। यानी सीपेट संस्थान के अंदर रामविलास पासवान वाला शिलापट्ट गटर ढंकने के काम में इस्तेमाल किया जा रहा है। जब इस बाबत सीपेट संस्थान से जुड़े अधिकारी से पूछा गया तो वो पत्रकार को ही हाथ पकड़ बाहर करने लगे और पूछने लगे आप अंदर कैसे आए। फिर पत्रकार के तरफ से कहा गया कि आप कैसे रामविलास पासवान के शिलापट्ट के साथ ऐसा कर सकते हैं। जबाव आया- इधर आओ, इधर चलो। बात क्या करना है, ऐसे माइक लगा देगा तो जवाब देते रहेंगे। वहीं चिराग पासवान के निर्देश के बाद उनके पिता की नेमप्लेट को फिर से सम्मानजनक स्थान पर लगा दिया गया है।

गौरतलब है कि साल 1994 में हाजीपुर में सीपेट संस्थान बनाया गया था। पूरा कैंपस 5.65 एकड़ में फैला है। यहां तीन तरह के डिप्लोमा कोर्स होता है। पहला पोस्ट ग्रेजूएट डिप्लोमा इन प्लास्टिक प्रोसेसिंग एंड टेस्टिंग जो कि दो सालका कोर्स है, दूसरा डिप्लोमा इन प्लास्टिक टेकनोलॉजी जो तीन साल का कोर्स है और तीसरा डिप्लोमा इन प्लास्टिक मोउल्ड टेकनोलॉजी जो तीन साल का कोर्स है। सीपेट संस्थान राम विलास पासवान के काम की एक झलक भर है। उन्होंने तो अपने दम पर ऐसे कई संस्थान हाजीपुर में लेकर आए।