32 कहारों के कंधे पर बड़ी दुर्गा को दी गई विदाई

मुंगेर 32 कहारों के कंधों पर बड़ी दुर्गा महारानी का विसर्जन जुलूस निकल गया है. विसर्जन जुलूस में हजारों की तदाद में भक्तजन मां की जयकार करते हुए निकल गए हैं.

बता दें मुंगेर में यह है अनोखी परंपरा है कि मां विसर्जन के लिय कंधों पर ले जाया जाता है. विसर्जन रूट पर को गंगा जल से धोने के अलावा हर जगह मां के स्वागत के लिए रंगोली बनाई गई है.

मुंगेर में मां का विसर्जन यात्रा पूरे देश में विख्यात है इसका कारण है कि यहां मां की प्रतिमा का विसर्जन किसी वाहन पर नही बल्कि 32 कहारों के कंधों पर ले जाकर होती है और खास कर मुंगेर की बड़ी देवी मां के विसर्जन में लाखों लोग शामिल होते हैं हर किसी की तमन्ना होती है कति वे मां काकहार बन सकें. मंदिर से लेकर सोझी गंगा घाट तक दो किलोमीटर का सफर तय करने में 24 घंटा से भी ज्यादा का समय लग जाता है.

मां के विसर्जन रूट को गंगा जल से धोने के साथ साथ हर जगह मां के स्वागत के लिय फूलों की वर्षा के साथ साथ 56 प्रकार के भोग और नाच गान , रंगोली और आखडों जिसमे सेवक तरह तरह कर करतब दिखा शक्ति प्रदर्शन करते हैं.

वहीं मुंगेर मे आज से सोझी गंगा घाट में होने वाले प्रतिमा विसर्जन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह तैयार है. घाटों पर नाव के साथ एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की तैनाती के अलावा सीसीटीवी और भारी संख्या में पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है.

मुंगेर जमालपुर की लगभग 50 से अधिक प्रतिमाओं का विसर्जन मुंगेर के सोझी गंगा घाट पर दो दिनों तक लगातार होते रहता है . इस कारण इस गंगा घाट पर जिला प्रशासन की विशेष व्यवस्था रहती है

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