CM नीतीश बिहार में जमीन की खरीद बिक्री पर लेने जा रहे आज तक सबसे बड़ा फैसला, क्या होगा उसका प्रभाव

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जमीन की खरीद बिक्री को लेकर बड़ा फैसला लेने जा रहे हैं। इससे अब प्रदेश में जमीन की खरीद-बिक्री और आसान हो जाएगी। दरअसल, नीतीश सरकार ने राज्य में 13 और नए निबंधन दफ्तरों में ई-निबंधन सुविधा शुरु कर दी है। विभागीय सूत्रों की मानें तो 28 अक्टूबर तक 85 निबंधन कार्यालयों में ई-निबंधन की सुविधा शुरु की गई है। अगले महीने तक सभी 136 निबंधन कार्यालय में ई-निबंधन प्रक्रिया शुरु हो जाएगी।

ऑनलाइन रजिस्ट्री की सुविधा

बता दें कि, नए ई-निबंधन सॉफ्टवेयर में लोगों को घर पर बैठे ऑनलाइन रजिस्ट्री के आवेदन की सुविधा मिलेगी। वहीं राज्य सरकार ने सरकारी और सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीन का मुआवजा निर्धारित करने के तरीके में बदलाव किया है। अब से, जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के दिन लागू रजिस्ट्री मूल्य के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा।

क्या हुआ है बदलाव?

पहले, जमीन का मुआवजा 1 जनवरी 2014 के रजिस्ट्री मूल्य के आधार पर तय किया जाता था। ग्रामीण क्षेत्रों में इस मूल्य का चार गुना और शहरी क्षेत्रों में दो गुना मुआवजा दिया जाता था। लेकिन, यह तरीका अब बदल गया है।

नया नियम क्यों?

सर्वोच्च न्यायालय ने 2019 में एक मामले की सुनवाई करते हुए आदेश दिया था कि जमीन का मुआवजा अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के समय के बाजार मूल्य के अनुसार ही दिया जाना चाहिए। सरकार ने इसी आदेश के अनुसार यह बदलाव किया है।

इस बदलाव से क्या फायदा होगा?

यह बदलाव जमीन मालिकों को अधिक न्यायसंगत मुआवजा दिलाएगा क्योंकि मुआवजे का निर्धारण अब जमीन अधिग्रहण के समय के वास्तविक बाजार मूल्य के आधार पर होगा। यह बदलाव मुआवजे के निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाएगा।  इस बदलाव से जमीन अधिग्रहण को लेकर होने वाले विवादों में कमी आएगी।

सरकार ने क्या किया?

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस संबंध में एक नया आदेश जारी किया है। इस आदेश में पुराने सभी नियमों को रद्द कर दिया गया है। यह बदलाव तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। 

अब से, सभी जमीन अधिग्रहण मामलों में इसी नए नियम का पालन किया जाएगा। यह जानकारी उन सभी लोगों के लिए उपयोगी होगी जिनकी जमीन सरकारी या सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जा रही है।

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