बक्सर: जिले में मारवाड़ी समाज के द्वारा तुलसी विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें भगवान श्री शालिग्राम की बारात निकाली गई और नगर भ्रमण करने के पश्चात बारात फिर अंबेडकर चौक के समीप श्याम उत्सव वाटिका में पहुंची, जहां भगवान श्री हरि विष्णु और माता तुलसी का विधि विधान पूर्वक विवाह संपन्न कराया गया.

दरअसल, पूरे रास्ते बारात पर पुष्प वर्षा होती रही और ढोल-नगाड़ें की थाप पर इस अलौकिक बारात में बाराती बने सभी श्रद्धालु झूमते-नाचते रहे. इस दौरान पारंपरिक शादियों में होने वाले द्वार पूजा, द्वार छेकाई और जयमाला की रस्म भी अदा की गई. साथ ही बारात में शामिल सभी लोगों के साथ-साथ सभी श्रद्धालु भक्तों के लिए प्रतिभोज की भी विशेष व्यवस्था की गई.

सभी मांगलिक कार्य शुरु
गोयल धर्मशाला के पुजारी ने बताया कि प्रबोधिनी एकादशी को देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है. इसी दिन से सभी मांगलिक कार्य शुरु हो जाते हैं. भगवान शालिग्राम और माता तुलसी का विवाह इसी दिन होता है. उस दिन विवाह होने के बाद आज पुनः लोकाचार के साथ सभी वैवाहिक रस्में संपन्न की जा रही हैं.

सनातन परंपरा को कायम रखने का उद्देश्य
बारात में शामिल एक व्यक्ति ने बताया कि हर साल भगवान शालिग्राम माता तुलसी के विवाह का कार्यक्रम कराया जाता है, जिससे कि हमें धन-धान्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. वहीं, उन्होंने बताया कि सनातनियों के द्वारा भगवान शालिग्राम और माता तुलसी की शादी का यह कार्यक्रम सनातन परंपरा को कायम रखने और अगली पीढ़ी को संदेश देने के लिए आयोजित किया गया था.


