स्कूल में नहीं, 100 किमी दूर बैठकर हाजिरी! बिहार के इन 7 शिक्षकों पर गिरी गाज

किशनगंज:​ बिहार के किशनगंज जिले में जिला शिक्षा पदाधिकारी नासिर हुसैन ने ई-शिक्षाकोश पोर्टल के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का खुलासा किया है. विभाग द्वारा जारी पत्रांक 760 के तहत जिले के विभिन्न सरकारी स्कूलों में तैनात सात शिक्षकों को सैकड़ों किलोमीटर दूर से हाजिरी लगाते पकड़ा गया. ये शिक्षक किशनगंज जिले से बाहर रहकर ‘मार्क ऑन ड्यूटी’ का विकल्प इस्तेमाल कर नियमित रूप से उपस्थिति बना रहे थे.

आरोपित शिक्षकों पर विभाग की सख्ती

समीक्षा के दौरान पाया गया कि शिक्षक अपने कर्तव्यों से पूरी तरह मुंह मोड़कर दूर-दराज के इलाकों में रह रहे थे, फिर भी पोर्टल पर हाजिरी दर्ज हो रही थी. शिक्षा विभाग ने इसे घोर अनुशासनहीनता, धोखाधड़ी और सरकारी कार्य के प्रति लापरवाही करार दिया है. डीईओ नासिर हुसैन ने मामले में तुरंत संज्ञान लेते हुए सभी आरोपित शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा है.

आरोपित शिक्षकों के नाम

प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय पोठिया के सहादत हुसैन अंसारी, मध्य विद्यालय भोगडाबर ठाकुरगंज के मो. नाहिद रजा, उत्क्रमित मध्य विद्यालय डांगीबस्ती की सोनम राय, नवप्राथमिक विद्यालय गिधिन गोला पासवान टोला के प्रवीण कुमार, उत्क्रमित मध्य विद्यालय दुराघाटी के प्रधानाध्यापक महबूब आलम, उच्च माध्यमिक विद्यालय बरचौंदी के लोकेश कुमार और मध्य विद्यालय बनगामा बहादुरगंज के असगर बेलाल शामिल हैं.

शिक्षकों को दो दिन का समय

सभी सात शिक्षकों को दो दिनों के अंदर अपना लिखित जवाब जमा करने का निर्देश दिया गया है. विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि यदि संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो इनके विरुद्ध आरोप-पत्र तैयार कर कठोर अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की जाएगी, जिसमें वेतन रोकना, पद से हटाना या बर्खास्तगी तक की सजा शामिल हो सकती है.

शिक्षा विभाग में हड़कंप

इस खुलासे के बाद किशनगंज जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है. कई अन्य स्कूलों की उपस्थिति की भी जांच शुरू कर दी गई है. अधिकारी अब यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि अन्य शिक्षक भी इसी तरह की अनियमितताओं में तो संलिप्त नहीं हैं.

पोर्टल की विश्वसनीयता पर सवाल

ई-शिक्षाकोश पोर्टल को पारदर्शिता बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन इस मामले ने पोर्टल की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं भौगोलिक लोकेशन ट्रैकिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी मजबूत व्यवस्था अपनाए बिना ऐसे घोटाले रोकना मुश्किल है.

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