बिहार के न्यायिक अधिकारियों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। पटना हाईकोर्ट ने जिला न्यायपालिका के न्यायिक पदाधिकारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की दिशा में अहम पहल की है। अगर राज्य सरकार की ओर से भी इस प्रस्ताव पर मुहर लग जाती है तो बिहार में न्यायिक सेवा के अधिकारियों को दो साल अतिरिक्त सेवा का मौका मिलेगा।

यह पहल सुप्रीम कोर्ट के ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन बनाम भारत सरकार एवं अन्य मामले में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने जिला न्यायपालिका से जुड़े न्यायिक पदाधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के संबंध में निर्देश दिए थे। इसी के मद्देनजर पटना हाईकोर्ट ने अब आगे की कार्रवाई शुरू की है।

जानकारी के मुताबिक, पटना हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश सुधीर सिंह की अध्यक्षता में 18 अगस्त को हुई पूर्ण न्यायालय यानी फुल कोर्ट की बैठक में इस संबंध में फैसला लिया गया था। पूर्ण न्यायालय के निर्णय के बाद हाईकोर्ट के महानिबंधक ने सोमवार को सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर निर्णय से अवगत कराया है।पत्र में राज्य सरकार से इस मामले में आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। अब निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि सरकार इस प्रस्ताव पर जल्द निर्णय ले सकती है।

सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का प्रस्ताव जिला अदालतों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। न्यायिक अधिकारियों की सेवा अवधि दो साल बढ़ने से अनुभवी जजों के लंबे न्यायिक अनुभव और संस्थागत ज्ञान का ज्यादा समय तक इस्तेमाल किया जा सकेगा।इसका सीधा फायदा न्याय प्रशासन को मजबूत करने में मिल सकता है। अनुभवी न्यायिक अधिकारियों के पास लंबे समय से लंबित मुकदमों, जटिल कानूनी मामलों और न्यायिक प्रक्रिया की गहरी समझ होती है। ऐसे अधिकारियों की सेवाएं जारी रहने से मामलों के निपटारे में भी तेजी आने की उम्मीद है।

न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 62 वर्ष होने से जिला एवं सत्र न्यायालयों के साथ-साथ अनुमंडल न्यायालयों में पदस्थापित न्यायिक सेवा के अधिकारियों को भी फायदा मिलेगा। इससे न्यायपालिका को अनुभवी अधिकारियों की सेवाएं अतिरिक्त दो वर्षों तक मिल सकेंगी।बिहार में अदालतों पर मुकदमों का बढ़ता बोझ लंबे समय से एक चुनौती रहा है। ऐसे में अनुभवी न्यायिक अधिकारियों की सेवा अवधि बढ़ने से लंबित कांडों के निपटारे में तेजी और मुकदमों के बोझ में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।अगर राज्य सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देती है तो बिहार न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने वाला देश का पहला राज्य बन सकता है। हालांकि अंतिम फैसला राज्य सरकार की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।फिलहाल पटना हाईकोर्ट की पहल ने न्यायिक सेवा से जुड़े अधिकारियों के बीच उम्मीद जगाई है। अब सभी की नजरें राज्य सरकार के फैसले पर हैं कि 60 साल की मौजूदा सीमा को बढ़ाकर 62 साल करने के प्रस्ताव पर कब मुहर लगती है।