त्योहारों के मौसम को देखते हुए बिहार में मिलावटी और खराब खाद्य पदार्थों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और प्रवर्तन अभियान तेज कर दिया है। आम लोगों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और मिलावट रहित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के मकसद से राज्यभर में खाद्य प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया जा रहा है। जांच के दौरान संदूषित, खराब और एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री को मौके पर हटाकर नष्ट कराया जा रहा है, जबकि संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने वैज्ञानिक जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजे जा रहे हैं।

स्वास्थ्य सचिव-सह-खाद्य संरक्षा आयुक्त कुमार रवि ने बताया कि अगस्त के अंतिम सप्ताह से चल रहे विशेष अभियान में अब तक 417 खाद्य नमूने संग्रहित किए गए हैं। इनमें दूध एवं दुग्ध उत्पाद के 149, मिठाई के 88, मसाले एवं सॉस के 56, पेय पदार्थ के 33, अनाज एवं दाल के 60, खाद्य तेल के 13 और स्ट्रीट फूड के 18 नमूने शामिल हैं।

अभियान के दौरान कई जगह खराब और एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री पर कार्रवाई की गई। खराब पेड़ा, बर्फी, लड्डू और केक नष्ट कराए गए। पटना में रात में बचे हुए इस्तेमाल किए गए तेल को भी फिंकवाया गया। प्रतिष्ठानों को खाद्य एवं गैर-खाद्य सामग्री अलग रखने, बर्तनों की सफाई और पानी की स्वच्छता सुनिश्चित करने की हिदायत दी गई है।
त्योहारों से पहले मिठाई, दूध, तेल, मसाले, पेय पदार्थ और तैयार खाद्य सामग्री पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। खाद्य कारोबारियों को FIFO यानी पहले आए सामान को पहले बेचने और FEFO यानी जिसकी एक्सपायरी पहले हो, उसे पहले बेचने की व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया गया है।
सभी खाद्य प्रतिष्ठानों में FSSAI लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन प्रमुखता से प्रदर्शित करना अनिवार्य है। रसोई कर्मियों को ग्लव्स और हेयर नेट इस्तेमाल करने तथा खुले में मसालों की बिक्री नहीं करने की हिदायत दी गई है। बार-बार इस्तेमाल किए गए तेल या पुरानी चाशनी में खाद्य पदार्थ तैयार करने पर भी सख्ती बरतने के निर्देश हैं।

विभाग ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को नियमित निरीक्षण और प्रभावी कार्रवाई का निर्देश दिया है। FoSCoS पोर्टल पर निरीक्षण, नमूना संग्रहण, जांच और प्रवर्तन कार्रवाई की तत्काल डिजिटल रिपोर्टिंग होगी। विभाग ने साफ किया है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।
