किशनगंज: रेल मंत्रालय ने मालगाड़ियों से आने वाले सामान की समय पर निकासी सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के क्षेत्राधिकार में आने वाले किशनगंज, कटिहार सहित कुल 59 स्टेशनों को ‘अधिसूचित’ या खास स्टेशन घोषित किया गया है. रेलवे बोर्ड की 14 अगस्त 2026 की अधिसूचना के तहत यह व्यवस्था 25 अगस्त 2026 से लागू हो गई है और फिलहाल छह महीने के लिए प्रभावी रहेगी.

नये रेलवे नियम के पीछे की वजह
यह कदम रेल अधिनियम 1989 की धारा 89 की उप-धारा 1 के तहत उठाया गया है. अधिनियम के अनुसार जिन स्टेशनों पर विशेष रूप से मालगाड़ियों द्वारा ढुलाई होती है, वहां माल पहुंचने के बाद बिना अनावश्यक देरी के निकासी अनिवार्य है. इस प्रावधान का उद्देश्य स्टेशन परिसरों को अव्यवस्थित होने से बचाना है.
सात दिन की समय सीमा और नीलामी का अधिकार
अधिसूचित स्टेशनों पर माल पहुंचने (ट्रांजिट समाप्त होने) के सात दिन के भीतर उसे उठाना जरूरी होगा. निर्धारित समय में न उठाने पर रेलवे को सार्वजनिक नीलामी का कानूनी अधिकार मिल जाएगा. हालांकि नीलामी शुरू होने से पहले हकदार व्यक्ति बकाया भाड़ा, विलंब शुल्क (डेमरेज) और अन्य खर्च चुकाकर अपना माल छुड़ा सकता है.

प्रमुख स्टेशनों की सूची
एनएफआर की जारी सूची में बिहार, अगरतला समेत उदयपुर तक के स्टेशन शामिल हैं. कटिहार 317वें, किशनगंज 319वें, न्यू जलपाईगुड़ी 326वें, पूर्णिया 329वें और सिलीगुड़ी 337वें क्रम पर हैं. अररिया, बथनाहा, डालखोला, डिमापुर, फालाकाटा और रंगापानी जैसे स्टेशन भी इस सूची में हैं.
सीमांचल क्षेत्र पर विशेष फोकस
बिहार और उत्तर बंगाल के सीमांचल इलाके के कई महत्वपूर्ण व्यापारिक स्टेशन इस अधिसूचना में शामिल किए गए हैं. किशनगंज और कटिहार जैसे स्टेशनों पर पहले माल के ढेर लगने से मालगाड़ियों के रोटेशन में बाधा उत्पन्न हुई थी, जिससे व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान हुआ था.

नए नियम का मुख्य उद्देश्य
रेलवे का मुख्य लक्ष्य स्टेशन परिसरों को डंपिंग ग्राउंड बनने से रोकना और माल ढुलाई के रोटेशन को तेज करना है. समय पर निकासी से ट्रैक और यार्ड की उपलब्धता बढ़ेगी तथा फ्रेट सेवाएं अधिक कुशल बनेंगी.
व्यापारियों और संस्थानों पर प्रभाव
किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, अररिया और डालखोला जैसे स्टेशनों पर कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों तथा औद्योगिक इकाइयों को अब अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी. अनाज, सीमेंट, उर्वरक जैसी सामग्री मंगाने वाले व्यापारियों को माल पहुंचते ही निकासी की व्यवस्था करनी होगी, अन्यथा नीलामी का जोखिम रहेगा.

लाभ और अपेक्षित सुधार
यह कदम शिथिल कारोबारियों को अनुशासित करेगा तथा रेलवे को अतिरिक्त राजस्व भी उपलब्ध कराएगा. फ्रेट बिजनेस अधिक जवाबदेह और त्वरित बनेगा, जिससे समग्र लॉजिस्टिक्स व्यवस्था सुधरेगी.
रेलवे की दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
सीमांचल के व्यापारियों को नई व्यवस्था के अनुकूल तुरंत तैयारी करनी चाहिए. समय पर निकासी सुनिश्चित करके वे न केवल अपने माल की सुरक्षा कर सकते हैं बल्कि रेलवे की माल ढुलाई क्षमता को भी मजबूत बनाने में योगदान दे सकते हैं. यह अधिसूचना रेलवे की दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.