बिहार में महिला सिपाही को 5 साल की जेल! 16.25 लाख जुर्माना, 14 साल पुराने केस में बड़ा फैसला; जानिए क्या है मामला

मुजफ्फरपुर: बिहार में भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। मुजफ्फरपुर जिला पुलिस बल की तत्कालीन महिला सिपाही बेबी कुमारी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही अदालत ने उन पर कुल 16 लाख 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। करीब 14 साल पहले दर्ज हुए इस मामले में आए फैसले ने एक बार फिर पुलिस विभाग में वेतन भुगतान से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले की याद दिला दी है। सवाल यह है कि आखिर एक महिला सिपाही के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला कैसे सामने आया और जांच में क्या-क्या खुलासे हुए?

मुजफ्फरपुर स्थित विशेष निगरानी न्यायालय के न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर की अदालत ने सोमवार को बेबी कुमारी के खिलाफ सजा सुनाई। इससे पहले पांच अक्टूबर को अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया था। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 11 गवाहों की गवाही कराई गई। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने इस मामले में वर्ष 2012 में 35 लाख 42 हजार 955 रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में केस दर्ज किया था।

पुलिसकर्मियों के वेतन भुगतान में गड़बड़ी से जुड़ा है मामला

इस मामले की जड़ें मुजफ्फरपुर पुलिस विभाग में हुए करोड़ों रुपये के कथित वेतन घोटाले से जुड़ी हैं। जांच के अनुसार, वर्ष 2006 से 2010 के बीच पुलिस अधिकारियों और जवानों के वेतन, एसीपी तथा एरियर के भुगतान में कथित तौर पर हेराफेरी की गई थी। इस पूरे मामले में पुलिस कार्यालय के तत्कालीन लेखापाल सुशील कुमार चौधरी की भूमिका सामने आई थी।

आरोप के मुताबिक, वेतन भुगतान की प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों के नाम सही रखे जाते थे, लेकिन बैंक खातों की जानकारी में बदलाव कर दिया जाता था। इसके बाद सरकारी राशि कथित तौर पर कुछ लोगों के खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि इस तरह पुलिसकर्मियों के वेतन और अन्य मदों की रकम को दूसरे खातों में भेजा गया। इस मामले में बेबी कुमारी के अलावा अन्य लोगों के नाम भी सामने आए। हालांकि, सभी आरोपितों के खिलाफ अलग-अलग मुकदमों में सुनवाई चल रही है।

छापेमारी में नकदी और संपत्ति के दस्तावेज मिले

मामले का खुलासा होने के बाद आरोपितों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, तलाशी के दौरान घरों से बड़ी मात्रा में नकदी, आभूषण और जमीन में निवेश से संबंधित दस्तावेज बरामद किए गए थे। कुछ जगहों पर नकदी घर के भीतर छिपाकर रखी गई थी। जांच के दौरान बेबी कुमारी के खाते में भी बड़ी रकम जमा होने की बात सामने आई। इसके बाद उनकी आय और संपत्ति के स्रोतों की पड़ताल की गई। निगरानी जांच में 35,42,955 रुपये की आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया। इसी केस में लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।

सात धाराओं में सजा, सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी

अदालत ने बेबी कुमारी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उन्हें पांच साल के कारावास और 7.50 लाख रुपये जुर्माने की सजा दी गई। इसके अलावा आपराधिक न्यासभंग, धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं में भी सजा सुनाई गई। आपराधिक साजिश के मामले में भी पांच साल की कैद और 7.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। अन्य धाराओं में तीन-तीन साल की सजा और अलग-अलग जुर्माने निर्धारित किए गए। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई तेज होने का दावा

बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार के 22 मामलों में लोकसेवकों को अदालत से दोषी ठहराया जा चुका है। ब्यूरो का कहना है कि वर्ष 2000 से 2024 के बीच सालाना औसतन 5.6 मामलों में सजा हुई थी, जबकि 2026 में अब तक हुई कार्रवाई इस औसत से काफी अधिक है। मुजफ्फरपुर का यह मामला बताता है कि सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया लंबी हो सकती है, लेकिन जांच और सुनवाई के बाद अदालत अपना फैसला सुनाती है। अब इस मामले में बेबी कुमारी को मिली सजा के साथ एक बार फिर सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल चर्चा में है।

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