मुजफ्फरपुर: शहर के गन्नीपुर स्थित बंगाली कॉलोनी का श्री श्री श्यामा काली मंदिर एक बार फिर बंगाली संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता के अनूठे संगम का साक्षी बनने जा रहा है। ढाक की गूंजती थाप, धूप और धुनुची से उठता सुगंधित धुआं, पारंपरिक धुनुची नृत्य और मां काली के जयकारों के बीच आगामी 8 से 10 नवंबर तक तीन दिवसीय मां काली पूजा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसको लेकर रविवार को मंदिर परिसर में सभी सदस्यों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें पूजा महोत्सव को भव्य एवं सफल बनाने के लिए विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में आयोजन की तैयारियों, मंदिर परिसर की सजावट, श्रद्धालुओं की सुविधा, धार्मिक अनुष्ठानों तथा प्रसाद वितरण सहित विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर सदस्यों ने अपने विचार साझा किए और सामूहिक रूप से आयोजन को सफल बनाने का संकल्प लिया।

मंदिर में मां काली की पूजा की परंपरा वर्ष 1961 से चली आ रही है। छह दशक से अधिक समय से यहां बंगाली रीति-रिवाज एवं पारंपरिक विधि-विधान के साथ मां की आराधना की जाती है। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ बंगाली संस्कृति, परंपरा और सामाजिक समरसता का भी अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है।


पूजा महोत्सव का प्रमुख आकर्षण पश्चिम बंगाल से आने वाले पारंपरिक ढाकी होंगे। ढाक की गूंजती थाप के बीच धुनुची आरती का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बंगाली महिलाएं एवं पुरुष पारंपरिक अंदाज में धुनुची लेकर भक्ति नृत्य करते हुए मां की आराधना करेंगे। इसके साथ ही मध्यरात्रि में विशेष निशा पूजा आयोजित होगी, जो इस महोत्सव का प्रमुख धार्मिक आकर्षण रहेगी।


पूजा के दौरान मां को खिचड़ी, सब्जी, खीर एवं विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण होगा। आयोजन की सबसे खास परंपरा यह है कि सभी श्रद्धालु बिना किसी भेदभाव के एक ही पंक्ति में बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। अमीर-गरीब और छोटे-बड़े का भेद मिटाकर सामूहिक रूप से प्रसाद ग्रहण करने की यह परंपरा सामाजिक एकता एवं समानता का संदेश देती है।


मंदिर के प्रधान पुरोहित भरत चक्रवर्ती के मार्गदर्शन में संपूर्ण पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान पारंपरिक विधि-विधान से संपन्न कराए जाएंगे। मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी, फूलों एवं पारंपरिक बंगाली सजावट से भव्य रूप दिया जाएगा। आयोजन की तैयारियों में बंगाली कॉलोनी के युवा भी बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। बुजुर्गों के अनुभव और युवाओं के उत्साह से इस पारंपरिक आयोजन को यादगार बनाने की तैयारी है।

आयोजन के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 8 नवंबर, रविवार को रात्रि में पूजा महोत्सव का शुभारंभ होगा। 9 नवंबर, सोमवार को शाम 7:30 बजे से धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे तथा मध्यरात्रि में विशेष निशा पूजा होगी। वहीं, 10 नवंबर, मंगलवार को भी धार्मिक अनुष्ठान एवं पूजा-अर्चना के कार्यक्रम संपन्न होंगे। मंदिर में मां की प्रतिमा स्थायी रूप से स्थापित होने के कारण प्रतिमा विसर्जन की परंपरा नहीं है।


आयोजकों ने शहरवासियों एवं समस्त श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर मां श्यामा काली का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की है। यह महोत्सव एक बार फिर धार्मिक आस्था, बंगाली सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का सुंदर संदेश प्रस्तुत करेगा।
