वैशाली में AK-56 बरामद, बिहार में पांचवी बार AK-56 की हुई बरामदगी, अपराध जगत में एके-56 की इंट्री

VAISHALI (ARUN KUMAR) : वैशाली जिले के राघोपुर में पहली बार  AK-56 एसॉल्ट राइफल बरामद की गयी है। पुलिस अभी तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। पुलिस की जांच जारी है कि बरामद किया गया AK-56 आखिर किस गिरोह या संगठन से जुड़ा है. लेकिन इन सब के बीच सवाल यह है कि आखिर बिहार में इतने खतरनाक हथियार को पहुंचा रहा है. ये हथियार कहां से आ रहे हैं और इनके लिए फंडिंग कहां से हो रही है. वैशाली जिले में पहली बार एके-56 मिलने से हड़कंप है.

मिली जानकारी के अनुसार वैशाली जिले के राघोपुर के रुस्तमपुर सहायक थाना क्षेत्र के जाफराबाद गांव से पुलिस ने AK-56 एसॉल्ट राइफल बरामद करने में सफलता हासिल की है.  पुलिस द्वारा  04 जिंदा कारतूस भी बरामद की गई है. पुलिस अभी तक आरोपित को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। AK-56 एसॉल्ट राइफल बरामदगी जिले में यह पहली घटना है। AK-56 की बरामदगी के संबंध में एसपी मानवजीत सिंह ढिल्लो ने बताया कि गुप्त सूचना मिली थी कि किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के उद्देश्य से जफराबाद गांव में कुख्यात शंकर राय के पास AK-56 एसॉल्ट राइफल छिपा कर रखी गयी है. पुलिस टीम ने शंकर राय के गौशाला से AK-56 राइफल व 04 जिंदा कारतूस बरामद कर लिया है. फिलहाल आगे की जांच जांच-पड़ताल की जा रही है. डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय ने वैशाली एसपी मानवजीत सिंह ढिल्लो की कार्रवाई की प्रशंसा करते हुए कहा है वैशाली एसपी के नेतृत्व में वैशाली पुलिस ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए AK-56 बरामदगी कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जिसके लिए पुलिस टीम बधाई के पात्र हैं. जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर मामले का पटाक्षेप कर लिया जाएगा।

लोकसभा चुनाव से पहले बिहार में AK-56 की बरामदगी को लेकर ख़ुफ़िया विभाग समेत इंटेलिजेंस के कान खड़े हो गए हैं. AK-56 राइफल किस ग्रुप या संगठन से जुड़ा है तथा किस उद्देश्य से जिले में लाया गया था. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इसकी बरामदगी से एक बड़ा प्रश्न खड़ा होता है. पुलिस के लिए यह पता लगाना अहम बन गया है कि आखिर एके-56 जैसे हथियार वैशाली में कैसे आए. इस हथियार की किसने खरीद की और कब-कब इस हथियार का उपयोग किया गया. अब तक इलाके के लोग एके-47 जैसे हथियारों के बारे में सुनते थे। मुंगेर में एके-47 की बड़ी खेप बरामद होने के बाद सूबे की पुलिस एके-47 की तलाश में थी, इसी बीच वैशाली जिले के राघोपुर के रुस्तमपुर सहायक थाना क्षेत्र के जफराबाद गांव में एके-56 की बरामदगी ने पुलिस मुख्यालय की भी नींद उड़ा दी है. अब एक बार फिर अपराधी गिरोह के पास से AK-56 की बरामदगी से साफ हो गया है कि बिहार में इस तरह स्वचालित अत्याधुनिक हथियार कमोबेश सभी आपराधिक गिरोहों के पास मौजूद है.

एके-47 और एके-56 जैसे अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री का सबसे बड़ा केंद्र नॉर्थ-इस्ट के राज्य नागालैंड है। नागालैंड में बर्मा और बाग्लादेश के रास्ते विदेशी हथियार पहुंचते रहें हैं। हथियार तस्करों के गिरोह पूर्व में नक्सलियों तक हथियार पहुंचाते थे, बाद में अपराधियों तक हथियार पहुंचाए जा रहे है।

पहली घटना : दो माह पूर्व ही 11 जनवरी 2019 सीतमाढ़ी जिले के महिंदवारा थाने के कुंडल गांव में सड़क निर्माण कर रही कंस्ट्रक्शन कंपनी के मुंशी विनोद राय की हत्या मामले में स्पेशल टीम ने एके-56 के साथ चार शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है. मुंशी की हत्या में इसी एके-56 राइफल का इस्तेमाल किया गया था. दिलशाद के घर से ही जयशंकर राय को गिरफ्तार करते हुए तलाशी के क्रम में मुंशी की हत्या में उपयोग की गयी एके-56 ऑटोमेटिक राइफल, एक खोखा व 9 एमएम का जिंदा कारतूस, यामाहा कंपनी की एफजेड बाइक व एक मोबाइल बरामद किया गया था. पूछताछ में एक अपराधी ने खुलासा किया था कि सरोज राय गिरोह के पास एके-47 भी है, जो मणिपुर के इंफाल से खरीद कर लायी गयी है.

दूसरी घटना : इसके पूर्व 14 जून 2016 को एसटीएफ की टीम ने सीतामढ़ी पुलिस के सहयोग से दरभंगा जेल में बंद शातिर मुकेश पाठक की निशानदेही पर शिवहर जिले के पुरनहिया थाना के दोस्तिया गांव में छापेमारी कर संतोष झा के चचेरे भाई संजय झा को एके-56 के साथ गिरफ्तार किया था। दरभंगा जिले के बहेड़ी में दो अभियंताओं की हत्या के बाद इस एके-56 को दोस्तिया गांव में छिपा कर रखा गया था।

तीसरी घटना : जबकि 6 मार्च 2016 को गोपालगंज जिले के प्रतापपुर थाना के झाझागढ़ में एक एके-56 बरामद किया गया था।
चौथी घटना : 20 नवंबर 2015 को बेगुसराय जिले के बलिया थाना के भगतपुर से एके-56 के साथ दो अपराधी पकड़े गए थे। इस तरह वैशाली जिले के जफराबाद गांव से एके-56 की बरामदगी का यह मामला बिहार में पांचवा मामला है। वैशाली में पूर्व में भी पुलिस ने 2012 में सहदेई बुजुर्ग ओपी के रामपुर खैरी गांव से कुख्यात संजय राय के घर से AK-56 की बरामदगी की थी. पुलिस ने उक्त मामले में संजय राय के भतीजे प्रमोद राय को गिरफ्तार किया था. विदित हो कि कुख्यात संजय राय 20 जुलाई, 2011 को महाराजगंज के तत्कालीन सांसद उमाशंकर सिंह के आवास पर हुए तिहरे हत्याकांड का आरोपित था.

कभी इस तरह के हथियार के किस्से सुने जाते थे, लेकिन अब बिहार के आपराधिक गिरोहों तक इन हथियारों की पहुंच बन गई है। बताया जा रहा है कि एके-47 और एके-56 जैसे अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री का सबसे बड़ा केंद्र नॉर्थ-इस्ट के राज्य नागालैंड है। नागालैंड में बर्मा और बाग्लादेश के रास्ते विदेशी हथियार पहुंचते रहें हैं। हथियार तस्करों के गिरोह पूर्व में नक्सलियों तक हथियार पहुंचाते थे, बाद में अपराधियों तक हथियार पहुंचाए जा रहे है। हालांकि अनुसंधान प्रभावित नहीं हो, इसके लिए एसपी ने कुछ तथ्यों से पर्दा नहीं उठाया है।

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