केंद्र सरकार ने राफेल सौदे पर नया हलफनामा दायर करने के लिए उच्चतम न्यान्यालय से माँगा समय

केंद्र सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि वह राफेल सौदे पर मंगलवार को होने वाली सुनवाई को टाल दे क्योंकि उसे हलफनामा दायर करने के लिए और समय की जरुरत है। मुख्य न्यायधीश के नेतृत्व वाली पीठ के समक्ष सरकार के अनुरोध का उल्लेख किया गया। केंद्र ने याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने की जरूरत को आधार बताते हुए राफेल मामले की समीक्षा पर होने वाली सुनवाई स्थगित करने के पत्र को प्रसारित करने के लिए भी न्यायालय की सहमति मांगी है।

न्यायालय ने केंद्र को सुनवाई स्थगित करने के पत्र को मामले के पक्षों तक भेजने की अनुमति दे दी है। अदालत सरकार के अनुरोध पर बाद में फैसला करेगा। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पीठ ने केंद्र सरकार के वकील को पार्टियों के बीच उस पत्र को प्रसारित करने की अनुमति दी है। इससे पहले अदालत ने 10 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र द्वारा उठाई गई प्रारंभिक आपत्तियों को खारिज कर दिया था।

राफेल विमान (फाइल फोटो)

केंद्र ने दस्तावेजों पर विशेषाधिकार का दावा करते हुए कहा था कि राफेल लड़ाकू विमान के सौदे की दोबारा जांच के लिए इसपर भरोसा नहीं किया जा सकता है।अदालत ने एक मत से कहा था कि जो दस्तावेज सार्वजनिक हो गए हैं उसके आधार पर हम याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हैं। अदालत ने कहा था कि जो कागज अदालत में रखे गए हैं वह मान्य है। सरकार ने इन दस्तावेजों पर अपना विशेषाधिकार जताते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता ने इन्हें अवैध तरीके से हासिल किया है।

सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा था कि जहां तक राफेल फैसले पर समीक्षा याचिका की सुनवाई का सवाल है, इसपर बाद में विस्तृत सुनवाई की जाएगी। इसकी सुनवाई के लिए वह नई तारीख तय करेगा। राफेल मामले में अदालत को यह तय करना था कि इससे संबंधित रक्षा के जो दस्तावेज लीक हुए हैं, उस आधार पर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई की जा सकती है या नहीं।

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